भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने बॉयोमीट्रिक पहचान संख्या (आधार) से सुरक्षा की एक और परत जोड़ने का फैसला किया है. प्राधिकरण ने बताया कि आधार कार्ड धारकों के सत्यापन के लिए ‘फेस रेकग्निशन’ सुविधा शुरू जाएगी. इसके तहत व्यक्ति के चेहरे की स्कैनिंग के जरिए पहचान की जाती है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. प्राधिकरण ने कहा है कि आधार नामांकन के वक्त कार्ड धारकों की जो फोटो ली गई थी, उसे ही सत्यापन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. अभी तक आधार कार्ड धारकों का सत्यापन उनकी अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों के स्कैन के जरिए किया जाता था.

कंपनियों ने 30 लाख रसोई गैस खाते बंद किए

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने इस महीने करीब 30 लाख रसोई गैस कनेक्शन काट दिए हैं. साथ ही, एक करोड़ कनेक्शन जांच के दायरे में हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड ने कंपनियों के अधिकारियों और डीलरों के हवाले से कहा है कि बंद किए गए खाते घरेलू गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के गैर-नकदी हस्तातंरण अनुपालन (एनसीटीसी) वाले कनेक्शन हैं. एनसीटीसी कनेक्शन बैंक खातों से नहीं जुड़े होते हैं और उनपर सब्सिडी नहीं दी जाती है. बताया जाता है कि कंपनियों द्वारा यह कार्रवाई रसोई गैस का इस्तेमाल खाना बनाने के अलावा अन्य कामों में करने से रोकने के लिए की गई है. देश में रसोई गैस कनेक्शनों की कुल संख्या 25.11 करोड़ है.

सीपीएम ने भाजपा की एक चुनावी बैठक में एनएसए अजीत डोभाल की मौजूदगी पर सवाल उठाया

सीपीएम ने भाजपा की एक चुनावी बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की मौजूदगी पर सवाल उठाया है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक पार्टी ने त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए बुलाई गई बैठक में एनएसए की मौजूदगी को सरकारी कामकाज के नियमों का गंभीर उल्लंघन बताया है. इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई थी कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर पूर्वोत्तर राज्यों में चुनावी तैयारियों के लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं की बैठक हुई थी. बताया जाता है कि इस बैठक में अजीत डोभाल भी मौजूद थे.

सुप्रीम कोर्ट में अहम मामलों की सुनवाई के लिए गठित संवैधानिक पीठ से चार वरिष्ठतम न्यायाधीश बाहर

सुप्रीम कोर्ट में जारी विवाद के बीच समलैंगिकता और आधार जैसे अहम मामलों पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ का गठन किया गया है. अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक इस पीठ में शीर्ष न्यायालय के चार वरिष्ठतम जजों- न्यायाधीश जे चेलमेश्वर, न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायाधीश एमबी लोकुर और न्यायाधीश कुरियन जोसेफ को शामिल नहीं किया गया है. अखबार ने आधिकारिक जानकारी के हवाले से कहा है कि पीठ में इनकी जगह न्यायाधीश एके सीकरी, न्यायाधीश एएम खानविलकर, न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश अशोक भूषण शामिल हैं. बताया जाता है कि यह पीठ 17 जनवरी से आधार कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने और समलैंगिकता संबंधी अपने फैसले (2013) पर सुनवाई करेगी.

ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर इतिहासकार आशंकित

इतिहासकारों और पुरातात्विक विशेषज्ञों ने साल 1958 के ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर चिंता जाहिर की है. इन्हें इस बात की चिंता है कि यदि इससे संबंधित विधेयक राज्य सभा में पारित हो गया तो यह इन स्मारकों और स्थलों लिए नुकसानदायक हो सकता है. द हिंदू की खबर के मुताबिक इससे संबंधित संशोधन विधेयक को शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में पारित कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा जुड़े निर्माण कार्यों को अंजाम दिया जा सकता है. फिलहाल इस पर पूर्ण प्रतिबंध है.

आज का कार्टून :

सुप्रीम कोर्ट विवाद पर द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित कार्टून :