भारतीय सेना ने बीते 13 सालों के दौरान हर तीसरे दिन एक सैनिक खोया है. भारतीय सेना के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2005 से दिसंबर 2017 के बीच सेना के 1684 जवान शहीद हुए. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इसकी वजह पाकिस्तान द्वारा युद्धविराम का उल्लंघन, आतंकनिरोधी अभियान, जवाबी कार्रवाई, आक्रामक सामरिक मिशन और शान्ति बनाए रखने के लिए चलाए गए अभियान हैं.

बीती 15 जनवरी को भारतीय सेना की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक बीते साल भारतीय सेना में कार्यरत 87 लोग मारे गए. इसमें 23 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर सीमा के नजदीक मारे गए चार अन्य जवानों को भी शामिल किया जाए तो यह संख्या 91 हो जाती है. वहीं, 2016 में 86 सैन्यकर्मी मारे गए. इनमें 11 अधिकारी शामिल थे. इसी तरह 2015 में 85, 2014 में 65, 2013 में 64, 2012 में 75, 2011 में 71, 2010 में 187, 2009 में 107, 2008 में 71, 2007 में 221 और 2006 में 223 जवान मारे गए. सबसे ज्यादा जवान 2005 (342) में मारे गए थे.

जवानों को खोने का यह सिलसिला जारी है. बीते शनिवार जम्मू-कश्मीर की सीमा से सटे राजौरी जिले में पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलीबारी में लांस नाइक योगेश मुरलीधर भदाने बुरी तरह घायल होने के बाद शहीद हो गए. इससे पहले 23 दिसंबर, 2017 को राजौरी के केरी सेक्टर में भारतीय पोस्टों पर गोलीबारी की गई थी. इसमें एक मेजर समेत चार जवान शहीद हुए थे.