केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक साल 2017-18 में खेती की विकास दर 2.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. पिछले वर्ष (2016-17) यह दर 4.9 प्रतिशत रही थी. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कृषि मंत्रालय के आंकड़े भी खरीफ और रबी की खेती में गिरावट दिखा रहे हैं. ऐसा तब है जबकि 2016 की अपेक्षा 2017 में ज्यादा बारिश हुई थी.

ज्यादा बारिश होने के बाद भी खेती में गिरावट की मुख्य वजह कृषि पर निर्भर राज्यों में बारिश का असमान रूप से होना है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ यहां तक कि पंजाब में भी जुलाई के बाद काफी कम बारिश हुई. इसके बाद के चरण में भी बारिश न के बराबर हुई जिससे इन सभी राज्यों की खेती पर असर पड़ा, खास तौर पर रबी की खेती पर.

बारिश के अलग-अलग इलाकों में पर्याप्त मात्रा नहीं होने के चलते मिट्टी और जमीन के अंदर की मिट्टी में पर्याप्त नमी की कमी हो गई. इसकी वजह से 2016-17 की अपेक्षा 2017-18 में 14.46 लाख हेक्टेयर (एलएच) भूमि पर गेहूं की खेती में कमी देखने को मिली. जिन राज्यों में गेहूं की खेती में कमी आई उनमें मध्य प्रदेश (8.64 एलएच), उत्तर प्रदेश (2.12 एलएच), महाराष्ट्र (1.65 एलएच) और राजस्थान (1.49 एलएच) शामिल रहे. वहीं, रबी व सफेद सरसों जैसी दूसरी प्रमुख फसलों के लिए 3.12 लाख हेक्टेयर जमीन पर खेती नहीं हो पाई. इसके विपरीत 2016 में कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल को छोड़कर बाकी राज्यों में एक समान बारिश हुई थी. लेकिन दक्षिण भारत के ये राज्य खेती के लिहाज से इतने महत्वपूर्ण नहीं हैं जितने कि केंद्रीय या उत्तर-पश्चिम भारत के राज्य.