सार्वजनिक परिवहन सेवाएं देने वाली टैक्सियों और बसों को आगामी एक अप्रैल से ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरण और ‘अलर्ट बटन’ (जिसे दबाकर यात्री पुलिस की मदद ले सकते हैं) लगाना अनिवार्य होगा. रिक्शा और इलेक्ट्रिक रिक्शा को हालांकि इससे मुक्त रखा गया है. इस संबंध में मंत्रालय की तरफ से बुधवार को ट्वीट किया गया था. सड़क परिवहन मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए अब यह समय सीमा और नहीं बढ़ाई जाएगी.

सार्वजनिक वाहन ऐसे उपकरणों को, बनाने वालों या फिर उनके डीलरों से लगवा सकते हैं. वैसे पहले सुरक्षा के मद्देनजर
मंत्रालय ने 29 सीटों से ज्यादा वाली बसों में सीसीटीवी लगाने का प्रस्ताव भी दिया था. लेकिन इसे बाद में यात्रियों की निजता यानी प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए वापिस ले लिया गया.

सूत्रों के हवाले से ‘द टाइम्स आॅफ इंडिया’ ने लिखा है कि सार्वजनिक यातायात के वाहनों में लोकेशन बताने वाले उपकरण लगें, इसकी जिम्मेदारी राज्य परिवहन विभागों की होगी. साथ ही उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जैसे ही कोई यात्री उन वाहनों में लगा ‘अलर्ट बटन’ दबाता है तो विभाग और पुलिस की तरफ से उन्हें फौरन सहायता मुहैया कराई जाए.

हालांकि जानकारों के मुताबिक सिर्फ जीपीएस और अलर्ट बटन लगाना काफी नहीं है. समाज और विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ‘सेफ्टीपिन’ की सहसंस्थापक कल्पना विश्वनाथ कहती हैं, ‘जीपीएस और अलर्ट बटन लगाना ही समस्या का समाधान नहीं, इसकी कड़ी निगरानी भी जरूरी है. सुरक्षा संबंधी दूसरे इंतजामों पर भी लगातार सोचना होगा.’