पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है. इस तस्वीर में वे क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फ़िदेल कास्त्रो के साथ नज़र आ रही हैं. इन दिनों इस तस्वीर के वायरल होने की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय नेताओं से गले मिलने की नीति है जिसे लेकर उनके कट्टर समर्थक मानते हैं कि इसने भारत की छवि बदल कर रख दी है.

हुआ यह कि इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भारत आने से ठीक पहले कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले मिलने और हाथ मिलाने से जुड़े व्यवहार का मज़ाक़ उड़ाया गया था. कांग्रेस यह जताना चाह रही थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्य देशों के नेताओं से गले मिलते नहीं बल्कि उनके गले पड़ते हैं.

इसके जवाब में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की फ़िदेल कास्त्रो के साथ वाली एक तस्वीर वायरल हुई. तस्वीर को लेकर कहा जा रहा है, ‘ज़रा इंदिरा गांधी को एक विदेशी से गले मिलते देखो. राहुल गांधी, अपनी दादी के बारे में आपका क्या कहना है?’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अन्य देशों के नेताओं से गले मिलना मीडिया में कूटनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर चुटकियों का विषय रहा है. कूटनीतिक विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार भारत और अन्य देशों के नेताओं की बॉडी लैंग्वेज तक पर पैनी नज़र रखते हैं. मसलन, जब भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मिलते हैं तो मीडिया और अन्य विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर रहती है कि दोनों नेताओं में से किसने हाथ मिलाने के लिए पहले हाथ बढ़ाया. अगर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री पहले हाथ बढ़ाएंगे तो भारत में ब्रेकिंग न्यूज़ चलेगी, ‘पीएम मोदी को देखते ही पाकिस्तान प्रधानमंत्री ने हाथ बढ़ाया’. प्रधानमंत्री या ऐसे ही किसी पद पर बैठा व्यक्ति राष्ट्रीय अहम से जुड़ा होता है. इसीलिए किसी कम हैसियत वाले देश के नेता को ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत देना या किसी प्रतिद्वंद्वी या ज़्यादा ताक़तवर देश के नेता के आगे ज़्यादा उत्सुकता दिखाना बहस का मुद्दा बन जाता है.

कई लोग मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी का हर किसी से गले मिलना कूटनीति के लिहाज़ से सही नहीं है. यह भी कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी के गले मिलने से कई अंतरराष्ट्रीय नेता असहज दिखाई दिए हैं. लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू के मामले में ऐसा नहीं है. जब नरेंद्र मोदी इज़रायल गए और जब बेंजामिन नेतन्याहू भारत आए तो दोनों ही नेताओं ने आगे बढ़कर एक-दूसरे को भर-भर के गले लगाया. ऐसा एक नहीं बल्कि कई बार हुआ और यह बिल्कुल सहज दिखा.

नरेंद्र मोदी के समर्थकों के लिए निश्चित ही यह हर्ष और गर्व का विषय रहा. यही वजह है कि जब कांग्रेस ने मोदी की ‘आ गले लग जा’ नीति का मज़ाक़ उड़ाया तो मोदी समर्थक नाराज़ हो गए और इंदिरा गांधी के साथ फ़िदेल कास्त्रो वाली तस्वीर वायरल कर दी. अब सवाल यह है कि क्या वाक़ई में इंदिरा गांधी ने फ़िदेल कास्त्रो को गले लगाया था. तस्वीर में तो दोनों नेता गले मिलते दिख रहे हैं.

हमने यूट्यूब पर सर्च किया. दो वीडियो मिले. ये दोनों वीडियो फ़िदेल कास्त्रो की भारत यात्रा के हैं. इनमें इंदिरा गांधी को फ़िदेल कास्त्रो को रिसीव करते देखा जा सकता है. दोनों ही बार इंदिरा गांधी ने उनसे केवल हाथ मिलाया. बॉडी लैंग्वेज की बात करें तो इंदिरा गांधी काफ़ी स्थिर दिखाई दीं. वहीं, फ़िदेल काफ़ी उत्सुक दिखे. हालांकि दोनों ही नेता गले नहीं मिले. ये दोनों वीडियो इसलिए दिखाए कि नेताओं के विदेशी दौरों के दौरान सबसे गर्मजोशी वाला पल यही होता है. इसी दौरान दो नेता एक-दूसरे से हाथ मिलाते या गले मिलते दिखते हैं.

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अब उस तस्वीर पर आते हैं जिसमें फ़िदेल कास्त्रो और इंदिरा गांधी गले मिल रहे हैं. यह घटना फ़िदेल कास्त्रो के 1983 में हुए भारत दौरे की है. भारत गुटनिरपेक्ष सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा था. विज्ञान भवन में सदस्य देशों के प्रतिनिधि बैठे हुए थे. कास्त्रो सम्मेलन के अध्यक्ष थे. उन्हें इस आंदोलन की अध्यक्षता इंदिरा गांधी को सौंपनी थी. वे इसके लिए प्रतीकात्मक रूप से खड़े हुए. इंदिरा गांधी ने उनकी तरफ़ हाथ बढ़ाया, लेकिन कास्त्रो ने अपना हाथ नहीं बढ़ाया. इंदिरा ने फिर हाथ बढ़ाया, लेकिन कास्त्रो ने फिर हाथ नहीं मिलाया और मुस्कुराते रहे. इससे पहले कि इंदिरा कुछ समझ पातीं, फ़िदेल ने उन्हें अपनी विशाल भुजाओं में लेते हुए गले लगा लिया. इंदिरा उनके ऐसा करने की उम्मीद नहीं कर रही थी, इसीलिए थोड़ा चकित नज़र आईं. फ़िदेल कास्त्रो इंदिरा को अपनी बहन मानते थे.

यह ऐतिहासिक पल था. यहां यह कहना ज़रूरी है कि इंदिरा गांधी अपनी तरफ़ से फ़िदेल कास्त्रो से गले नहीं मिली थीं, बल्कि फ़िदेल ने ख़ुद पहल करते हुए उन्हें गले लगाया था. यानी कांग्रेस को जवाब देने के लिए इसे ‘इंदिरा का कारनामा’ बताना उचित नहीं है. गूगल पर इस घटना से संबंधित ढेरों मीडिया रिपोर्टें मौजूद हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर को भ्रामक रूप से पेश किया गया. यही नहीं, इंदिरा गांधी के पिता जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस के दूसरे नेताओं की तस्वीरें भी वायरल कर दी गईं. हम बता दें कि इन तस्वीरों में से कुछ तस्वीरें फ़ोटोशॉप के ज़रिए एडिट की गई हैं, और कुछ में नेहरू अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित के साथ हैं और दिग्विजय सिंह अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नज़र आ रहे हैं.