परमाणु आतूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के रास्ते में भारत एक कदम और आगे बढ़ा है. इस शुक्रवार को ही भारत को एक सशक्त अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘ऑस्ट्रेलिया ग्रुप’ का सदस्य बनाया गया है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया ग्रुप रासायानिक व जैविक हथियारों के प्रसार व निर्यात पर नियंत्रण करता है. यह समूह ठीक वैसा ही है जैसे एमटीसीआर (मिसाइल तकनीक कंट्रोल रिजीम) और वासेनार एग्रीमेंट. वासेनार एग्रीमेंट दुनिया में परंपरागत हथियारों के निर्यात और अतिसंवेदनशील वस्तुओं तथा तकनीक के दोहरे इस्तेमाल को नियंत्रित करता है. जबकि एमटीसीआर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिसाइल तकनीक के प्रसार का नियंत्रण करने वाला संगठन है.

इन सभी संगठनों में अमूमन उन्हीं देशों को सदस्यता मिली है जो परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तख़त कर चुके हैं. लेकिन भारत द्वारा एनपीटी पर दस्तख़त न करने बावज़ूद परमाणु अप्रसार के प्रति उसकी गंभीरता देखते हुए इन संगठनों में उसे सदस्यता दी गई है. इसीलिए एनएसजी की सदस्यता के लिए भी भारत की दावेदारी मज़बूत होती है. क्याेंकि उसके लिए भी पूर्व शर्त यही है. इसी आधार पर भारत को एनएसजी की सदस्यता देने का चीन विरोध भी कर रहा है.

यहां यह भी ग़ौरतलब है कि वासेनार और एमटीआर की तरह ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में भी चीन को सदस्यता नहीं मिली हुई है. इसीलिए वह चाहकर भी इन तीनों संगठनों में भारत का प्रवेश नहीं रोक सका. ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में भारत को सदस्यता दिए जाने पर विदेश मंत्रालय की ओर से ऑस्ट्रेलिया की राजनयिक जेन हार्डी को ख़ास धन्यवाद दिया है. वे कुछ समय पहले तक ऑस्ट्रेलिया ग्रुप की अध्यक्ष थीं. उन्होंने भारत को इस संगठन की सदस्यता दिए जाने में विशेष दिलसच्पी ली थी.