दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के कई कॉलेजों के प्रिंसिपल इन दिनों जांच के दायरे में हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन ख़ुद इनके ख़िलाफ़ जांच करा रहा है. डीयू के कुलपति योगेश त्यागी ने इसकी पुष्टि की है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार जिन प्रिंसिपलों की जांच हो रही है उन पर दाख़िलों में धांधली का आरोप है. इन्होंने 2017-18 में कई ऐसे बच्चों को अपने कॉलेजों में एडमिशन दिया जिनके नंबर कटऑफ से भी कम थे. यही नहीं कई को तो फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों के आधार पर ही प्रवेश दे दिया गया. एेसे कॉलेजों में स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज और शिवाजी कॉलेज के नाम शामिल बताए जाते हैं. हालांकि यूनिवर्सिटी परिसर में संचालित कोई कॉलेज जांच के दायरे में नहीं है.

डीयू के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, ‘जांच पूरी होने पर ही यह पता चलेगा की अनियमितता का दायरा कितना व्यापक है. यह किन-किन कॉलेजों तक फैली है. अभी हमने कुछ कॉलेजाें को चिह्नित किया है जहां ग़लत तरीके से बच्चों को प्रवेश दिए जाने की शिकायतें मिली हैं. वैसे अभी हम 2017-18 के मामलों की ही जांच कर रहे हैं. लेकिन अगर इस दौरान 2016 या उससे पहले के सालों के भी ऐसे मामलों की जानकारी मिली तो उनकी भी जांच होगी. ’

ऐसे ही एक अन्य अधिकारी कहते हैं, ‘जांच में आरोप सही पाए जाने पर इस तरह के सभी विद्यार्थियों के प्रवेश रद्द कर दिए जाएंगे.’ इस बाबत कुलपति त्यागी कहते हैं, ‘प्रवेश समिति इस पूरे मामले की निगरानी कर रही है. उसे यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस बाबत फ़ैसले लेने की पूरी आज़ादी दी गई है. इसके अलावा समिति यह भी सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है कि आगे इस तरह की अनियमिताताअों को प्रभावी तरीके से कैसे रोका जाए.’