मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि विपक्ष भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ संसद में महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है. उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी निष्पक्षता पर कोई समझौता नहीं हो सकता.’

उन्होंने कहा, ‘जहां तक विधायिका का ताल्लुक़ है तो उसके सामने सिर्फ़ एक ही विकल्प बचता है. वह विकल्प महाभियोग प्रस्ताव का है. अगर न्यायापालिका में कहीं कोई ख़ामियां पाई जाती हैं तो संसद उनसे महाभियोग प्रस्ताव के ज़रिए ही निपट सकती है. मुद्दे की बात इतनी है कि लोकतांत्रिक ढांचा सही ढंग से चलते रहना चाहिए. इसके लिए विधायिका और कार्यपालिका को देश और लोकतंत्र के हित में जब ज़रूरत पड़े क़दम उठाने चाहिए.’

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ येचुरी ने यह भी कहा है कि वे विपक्ष के अन्य दलों को सीजेआई के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे सूत्रों की मानें तो इस मामले में कांग्रेस भी प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है. हालांकि इस पर पार्टी ने अब तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया है. ख़बर है कि तृणमूल कांग्रेस, डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) जैसे कुछ अन्य दल भी इस प्रस्ताव को समर्थन दे सकते हैं.

सूत्र यह भी बताते हैं कि विपक्ष राज्य सभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की तैयारी कर रहा है. क्योंकि लोक सभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए कम से कम 100 सदस्यों के दस्तख़त की ज़रूरत पड़ती है. वहां इतनी सदस्य संख्या जुटाना विपक्ष के लिए मुश्किल है. जबकि राज्य सभा में प्रस्ताव पर 50 सदस्यों के हस्ताक्षर कर देने पर ही इसे पेश किया जा सकता है. वहां विपक्ष के इतने सदस्यों का समर्थन आसानी से मिल सकता है.

ग़ौरतलब है कि बीते 12 जनवरी को देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जज- जस्टिस जे चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लाेकुर और कुरियन जोसेफ़ मीडिया के सामने आए थे. उन्होंने मुख्य तौर पर जो चिंता जताई थी वह ये कि ‘संवेदनशील और अतिमहत्व के मामलों को सुनवाई के लिए किसी बेंच को सौंपते वक़्त सीजेआई जजों की वरिष्ठता ध्यान में नहीं रखते.’ इन जजों ने यह भी बताया था कि उन्होंने दो महीने पहले सीजेआई को पत्र लिखा था. लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया. इसलिए उन्हें मज़बूरन मीडिया के सामने आने का फ़ैसला करना पड़ा.