दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘लाभ का पद’ मामले में आम आदमी पार्टी के विधायकों को अयोग्य घोषित करने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. हालांकि, बुधवार को चुनाव आयोग का यह निर्देश जरूर दिया कि वह आप विधायकों की याचिका पर सोमवार को सुनवाई होने तक दिल्ली में उपचुनाव की कोई अधिसूचना जारी न करे. आप विधायकों ने ‘लाभ का पद’ मामले में अयोग्य ठहराने के फैसले के खिलाफ मंगलवार को नई याचिका लगाई थी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने आप विधायकों की याचिका पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा. अदालत ने इसके लिए चुनाव आयोग को एक हफ्ते का समय दिया है. अपनी याचिका में आप विधायकों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने ‘लाभ का पद’ मामले में राष्ट्रपति से सिफारिश करने से पहले उन्हें बात रखने का मौका नहीं दिया था. चुनाव आयोग ने बीते हफ्ते शुक्रवार को ‘लाभ का पद’ मामले में राष्ट्रपति से 20 आप विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति ने मान लिया.

आप विधायकों के खिलाफ ‘लाभ का पद’ का मामला इन्हें संसदीय सचिव बनाए जाने से जुड़ा है. अरविंद केजरीवाल सरकार ने 13 मार्च 2015 को इन्हें संसदीय सचिव बना दिया था, जबकि दिल्ली में संसदीय सचिव ‘लाभ का पद’ है. अधिवक्ता प्रशांत पटेल ने इसी बात की शिकायत राष्ट्रपति कर दी थी और इनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. इसके बाद राष्ट्रपति ने इस मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया था.