चीन बंदरों की क्लोनिंग में सफलता हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. यह उपलब्धि शंघाई स्थित चाइनीज अकादेमी ऑफ साइंस इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस के वैज्ञानिकों को मिली है. इन वैज्ञानिकों ने बंदरों की क्लोनिंग के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया है जिसके जरिए 20 साल पहले डॉली नाम की भेड़ का जन्म हुआ था.

1996 के दौरान स्कॉटलैंड के रोज़लिन इंस्टिट्यूट में जीव विज्ञानी इयान विल्मुट के नेतृत्व में दुनिया की पहली क्लोन भेड़ डॉली का जन्म हुआ था. तब इसे चिकित्सा विज्ञान की क्रांतिकारी खोज माना गया था.

रॉयटर्स के मुताबिक चीन में इस इंस्टिट्यूट से जुड़ी वैज्ञानिक मुमिंग पू ने इस उपलब्धि पर कहा है, ‘मनुष्य भी वानर प्रजाति में आते हैं... इस तरह हमने बंदरों की क्लोनिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी बाधा पार कर ली है. यह बाधा पार करने की वजह यह है कि हम ऐसे जानवरों के मॉडल तैयार करना चाहते हैं जिन पर मनुष्यों के लिए उपयोगी दवाओं का परीक्षण किया जा सके. हालांकि इस तकनीक को मनुष्यों के लिए इस्तेमाल करने का हमारा कोई इरादा नहीं है.’

चीन के इस संस्थान में करीब छह हफ्ते पहले जोंग जोंग और हुआ हुआ नाम के दो बंदरों का क्लोनिंग तकनीक से जन्म हुआ है. लंबी पूंछ वाले मकैक प्रजाति के ये बंदर समरूप जुड़वा (आइडेंटिकल ट्विन्स) हैं.

क्लोनिंग क्या है : किसी जीवित या पहले जीवित रहे जीव-जंतु के जैनेटिक पैटर्न की तर्ज पर हूबहू वैसे ही जैनेटिक पैटर्न वाले दूसरे जीव को विकसित करने की प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है. किन्हीं दो समरूप जुड़वां लोगों में यह जैनेटिक पैटर्न एक सा होता है और इसी के चलते ऊपरी तौर पर भी वे एक जैसे दिखते हैं.