‘मुझे भाजपा छोड़ने के लिए मजबूर न करें.’

— एकनाथ खडसे, वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री

भाजपा नेता एकनाथ खडसे का यह बयान पार्टी नेताओं से नाराजगी जताते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘मैं स्पष्ट कर दूं कि मैं पार्टी नहीं छोड़ना चाहता, लेकिन आप (भाजपा नेता) मुझे पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर न करें.’ पुणे-एमआईडीसी जमीन समझौते में घोटाले के आरोपों पर एकनाथ खडसे ने कहा कि उन्हें बगैर किसी गलती के सजा दी जा रही है. उन्होंने आगे कहा, ‘रहते थे जिनके दिल में, हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे हैं उनके कूचे में आज, गुनहगारों की तरह.’ महाराष्ट्र में भाजपा नेता भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त होने तक एकनाथ खडसे को कैबिनेट में जगह देने का विरोध कर रहे हैं. वहीं, कांग्रेस ने उन्हें पार्टी में शामिल होने का न्योता दे रखा है.

‘लगता है कि अमित शाह के पास दिमाग नहीं है.’

— सिद्धारमैया, कर्नाटक के मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह बात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आरोपों के जवाब में कही. गुरुवार को अमित शाह ने कहा था, ‘सिद्धारमैया का मतलब भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार का मतलब सिद्धारमैया है.’ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्विटर के जरिए भी अमित शाह पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा, ‘एक पूर्व कैदी ने दूसरे पूर्व कैदी को हमारे कर्नाटक चुनाव में अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाया है. क्या वे मेरे और मेरी सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्य पेश करेंगे?’ कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केवल झूठ बोलने से काम नहीं चलेगा, जनता उनके जुमलों पर भरोसा नहीं करने वाली है.


‘शिवसेना राजनीतिक रूप से काफी बुद्धिमान है.’

— देवेंद्र फड़णवीस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का यह बयान शिवसेना द्वारा 2019 का आम चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा पर आया. उन्होंने कहा कि कथनी और करनी में अंतर होता है. अपनी पार्टी को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार बताते हुए देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, ‘अगर कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ते हैं, जबकि भाजपा और शिवसेना अलग-अलग तो क्या लगता है कि केवल भाजपा को नुकसान होगा? इससे हमसे ज्यादा उन्हें (शिवसेना) नुकसान होगा.’ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि शिवसेना की अकेले चुनाव लड़ने की राय बाद में बदल जाएगी.


‘डोकलाम जैसी क्षणिक बाधाओं से निपटने के लिए भारत और चीन की जनता और नेता पर्याप्त अनुभवी और बुद्धिमान हैं.’

— गौतम बंबावाले, चीन में भारत के राजदूत

भारतीय राजदूत गौतम बंबावाले का यह बयान डोकलाम विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर आया. उन्होंने कहा, ‘मैं डोकलाम टकराव को लंबे संदर्भ में देखता हैं. अगर आप भी ऐसा करें तो पाएंगे कि डोकलाम विवाद लंबे इतिहास की अकेली घटना है.’ गौतम बंबावाले ने डोकलाम विवाद को जरूरत से ज्यादा हवा देने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि चीन को चीन-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) जैसे मामलों में भारत की चिंताओं के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है. भारतीय राजदूत के मुताबिक सीपीईसी परियोजना भारत के दावे वाले क्षेत्र से गुजर रही है जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है.


‘हमें बच्चों को सिखाना होगा कि उन्हें कैसा पुरुष बनना है.’

— मलाला युसुफजई, नोबल पुरस्कार विजेता और सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ता मलाला युसुफजई का यह बयान लड़कियों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए आया. दावोस में उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को महिलाओं के अधिकारों के बारे में बताना जरूरी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में मलाला युसुफजई ने कहा कि ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से महिलाओं के लिए भेदभावपूर्ण बातें सुनकर उन्हें तकलीफ होती है. सीरिया की एक शरणार्थी लड़की से मुलाकात का जिक्र करते हुए उनका कहना था कि इन लड़कियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की जरूरत है.