बीते कुछ समय से फ़ेसबुक और वाट्सएप पर एक मैसेज खूब वायरल हो रहा है. इसके मुताबिक़ वाराणसी की रहने वाली 15 साल की पूजा कुमारी सिंह के लीवर में इन्फ़ेक्शन है और वे दो महीने से ज़्यादा नहीं जी पाएंगी. डॉक्टरों ने उन्हें लीवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी है जिस पर 33 लाख रुपये का ख़र्च आएगा. पूजा के परिवार के पास इतना पैसा नहीं है. लिहाज़ा सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों से अपील की गई है कि अगर वे इस संदेश को शेयर करेंगे तो पूजा को हर शेयर पर 50 पैसे मिलेंगे.

वायरल मेसेज
वायरल मेसेज

लेकिन यह एक फ़र्ज़ी अपील है. सोशल मीडिया पर चेन मैसेजिंग सालों से चल रही है. इसे लेकर लोगों को कई बार आगाह किया गया है. लेकिन आज भी भारत समेत दुनिया भर में लोग चेन मैसेजिंग का शिकार होते हैं. इस तरह के संदेशों को शेयर करवाने के लिए लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल किया जाता है. ये भावनाएं किसी भी प्रकार की हो सकती हैं. मसलन, ‘भगवान की इस तस्वीर को शेयर करो. एक घंटे के अंदर-अंदर ख़ुशख़बरी सुनने को मिलेगी’, या ‘इस मासूम बच्ची के दिल में छेद है. आपके एक शेयर पर वाट्सएप (या फ़ेसबुक) इसे एक रुपया देगा. इस तरह सभी इस पोस्ट को शेयर करें तो इस मासूम की जान बचाई जा सकती है. क्या आप नहीं चाहते कि यह बच्ची इस दुनिया में रहे?’

लीवर इन्फ़ेक्शन के इलाज के लिए फ़र्ज़ी पूजा कुमारी सिंह का चेन मैसेजिंग के ज़रिए हरेक व्यक्ति से 50 पैसे मांगना इसी ‘इमोशनल अत्याचार’ का हिस्सा है. पूजा कुमारी सिंह नाम की कोई लड़की नहीं है. वाट्सएप पर केवल मैसेज सर्कुलेट हो रहा है. फ़ेसबुक पर तो कई सारी लड़कियों को पूजा कुमारी सिंह बताकर शेयर मांगे जा रहे हैं. नीचे कुछ मिसालें देखें.

इसी से साफ़ हो जाता है कि यह एक झूठी अपील है. सोशल मीडिया पर शेयर हो रही इस तरह की ज़्यादातर जानकारियां फ़र्ज़ी हैं. अगर एकाध सच्ची निकल भी जाए तो भी उसे वाट्सएप या फ़ेसबुक से एक पैसा नहीं मिलने वाला. क्योंकि यह झूठ है कि वाट्सएप-फ़ेसबुक किसी पीड़ित की मदद के लिए ‘एक शेयर पर 50 पैसे या एक रुपया’ दान देता है. फ़ेसबुक हेल्प कम्युनिटी के ज़रिए कई लोगों ने यह सवाल फ़ेसबुक से पूछा है. हम आपको ऐसे ही एक सवाल का जवाब बता रहे हैं.

मनिंदर सिंह ने फ़ेसबुक की हेल्प कम्युनिटी से दो साल पहले यह सवाल किया था कि क्या फ़ेसबुक लाइक्स और शेयर्स पर प्रोफ़ाइल पेजों को पैसा देता है. इस पर जवाब दिया गया, ‘नहीं. हम किसी चीज़ (पोस्ट) को लाइक या शेयर करने पर पैसा दानस्वरूप नहीं देते. धोखेबाज़ लोग इसलिए यह दावा करते हैं कि लोग उनके कॉन्टेंट को शेयर करें. इस तरह की शब्द-सामग्री स्पैम या धोखेबाज़ी हो सकती है जिसका मक़सद पेज की रेटिंग बढ़ाना होता है. अगर कोई यह दावा करता है कि लाइक या शेयर करने पर फ़ेसबुक पैसा दान करता है तो शेयर न करें. आप इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं.’

वाट्सएप अब फ़ेसबुक का ही हिस्सा है. यह फ़ेसबुक के अधीन होने से पहले भी एक फ़्री सर्विस थी और अभी भी इसके इस्तेमाल के लिए पैसा नहीं लिया जाता. जब वाट्सएप को फ़ेसबुक को बेचा गया तो उसके संस्थापकों ने वादा किया कि वे इसके काम करने के तरीक़े में बदलाव नहीं करेंगे. गूगल प्ले बताता है कि वाट्सएप के करीब सौ करोड़ यूज़र्स हैं. मान लें कि इनमें से ज़्यादातर अच्छे और समझदार लोग हैं, तब भी बचे यूज़र्स की संख्या करोड़ों में रहेगी. अगर शेयर पर किसी पीड़िता को पैसे मिलने की बात सच होती तो अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि स्थिति क्या होती. फ़ेसबुक-वाट्सएप को अरबों रुपये दान में देने पड़ते. फ़ेसबुक एक व्यापार-केंद्रित कंपनी है जिसे लाइक या शेयर मिलने पर कोई पैसा नहीं मिलता. इससे उसके सर्वर पर लोड ही पड़ता है.

हफिंगटन पोस्ट
हफिंगटन पोस्ट

चेन मैसेजिंग के संदेशों को शेयर करने वाले लोग कुछ सामान्य बातों पर ग़ौर कर लें तो इसका शिकार बनने से बच सकते हैं. दुनिया में दीन-दुखियों की कोई कमी नहीं है. यह संख्या अरबों में है. हाल में ख़बर आई थी कि पिछले साल दुनिया की कुल कमाई का 82 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ़ एक प्रतिशत सबसे अमीर लोगों की जेब में गया. दुनिया भर में लोग कई तरह के संकटों का सामना कर रहे हैं. ग़रीबी, कुपोषण, पलायन, भुखमरी से पीड़ित करोड़ों लोग हर वक़्त मदद की गुहार लगाते हैं. भारत में ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है. जानकारों के मुताबिक अगर फ़ेसबुक या वाट्सएप केवल लाइक और शेयर पर ही पैसा बांटने लगे तो एक दूसरी तरह का संकट खड़ा हो जाएगा. जब भी इस तरह का कोई मैसेज देखें तो यह ज़रूर चेक कर लें कि क्या उसके साथ कोई विश्वसनीय प्रमाण दिया गया है. मिसाल के लिए किसी विश्वसनीय समाचार संस्थान की ख़बर का लिंक. प्रमाण न हो तो मैसेज शेयर न करें.