‘भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रक्रियागत सुधार काफी नहीं हैं, बल्कि लोगों को आदत भी बदलनी होगी.’

— राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृहमंत्री

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान मोदी सरकार को भ्रष्टाचार रोकने के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा ही कहते हैं कि जब तक भ्रष्टाचार नहीं रुकता है हम गरीबी और अन्य समस्याओं को कैसे हल कर सकते हैं.’ राजनाथ सिंह ने आगे कहा, ‘यह सच्चाई है कि जब तक भ्रष्टाचार रहेगा, विकास का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाएगा जो हमने तय किया है.’ उनका यह भी कहना था कि देश में असमानता बढ़ने पर सामाजिक अशांति आती है जो सभी के लिए चिंता की बात है.

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर पर्यावरण कानूनों को उद्योगों के पक्ष में झुकाया जा रहा है.’

— जयराम रमेश, कांग्रेस नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री

कांग्रेस नेता जयराम रमेश का यह बयान केंद्र सरकार पक पर्यावरण कानूनों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘पर्यावरण मंत्रालय रबर स्टाम्प बनकर रह गया है.’ जयराम रमेश ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर्यावरण को लेकर जो भी बातें करते हैं, उसे कभी लागू नहीं करते. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशंसा की. जयराम रमेश ने कहा कि इंदिरा गांधी ने 1972 में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की बात कही थी और उसे रोजमर्रा के प्रशासन में शामिल किया था.


‘सामाजिक बुराइयों का इलाज कानून नहीं है.’

— असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम के प्रमुख और लोकसभा सांसद

लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने यह बात तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाले विधेयक को लेकर कही. उन्होंने कहा, ‘क्या कानून बनने के बाद तीन तलाक रुक जाएगा?’ असदुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि सख्त कानून बनाने के बावजूद दहेज हत्या और महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराध नहीं रुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा में लंबित तीन तलाक विधेयक मुस्लिम महिलाओं को सड़क पर लाने और मुस्लिम मर्दों को जेल भेजने की साजिश है. उनके मुताबिक मौलवियों की सलाह के बगैर भाजपा नीत एनडीए सरकार विधेयक को संसद में आगे बढ़ा रही है.


‘सेंसर बोर्ड बनाने और फिल्मों को सेंसर करने की पूरी अवधारणा ही गलत है.’

— नंदिता दास, अभिनेत्री और फिल्म निर्माता

अभिनेत्री नंदिता दास का यह बयान फिल्मों को सही या गलत बताकर होने वाले विरोधों पर आया. उन्होंने कहा, ‘चंद लोग तय करते हैं कि पूरा देश क्या देखना चाहता है?’ नंदिता दास ने आगे कहा कि संस्कृति के स्वघोषित ठेकेदारों द्वारा लोगों को सही या गलत बताने की प्रवृत्ति बहुत खतरनाक है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कला को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उसे आजादी देनी होगी. उनके मुताबिक सेंसर बोर्ड की व्यवस्था दर्शकों के महत्व को कमजोर कर देती है. अभिनेत्री नंदिता दास का कहना था कि अगर जनता अपनी आजादी के लिए आवाज नहीं उठाएगी तो कौन उठाएगा.


‘अगर सभी देश अपना-अपना एजेंडा बढ़ाने लगे तो दुनिया 1913 के दौर में लौट जाएगी.’

— जैद राद अल-हुसैन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त जैद राद अल-हुसैन का यह बयान वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी देशों को अमेरिका फर्स्ट जैसी नीति लागू करने की सलाह देने पर आया. उन्होंने कहा, ‘यह 20वीं सदी की स्क्रिप्ट है.’ जैद राद अल-हुसैन ने आगे कहा कि नस्लीय राष्ट्रवाद और अंधराष्ट्रवाद जैसी चीजें हमेशा ही दुनिया को मुश्किल में डालने वाली होती हैं. दावोस में ‘मुक्त व्यापार’ का विरोध करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दूसरों के हितों की कीमत पर इसे जारी रखना संभव नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका के दरवाजे व्यापार के लिए खुले हैं.