गूगल ने हर किसी को पत्रकार बनाने की तैयारी कर ली है. बीते शुक्रवार को कंपनी ने ‘बुलेटिन’ नाम से एक ऐसा एप लांच किया है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने इलाके से जुड़ी खबरें प्रकाशित कर सकेगा.

गूगल ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, ‘यह एक फ्री और काफी लाइट एप है. इसमें आप फोटो, वीडियो और टेक्स्ट के माध्यम से अपनी खबरों या अन्य चीजों को सीधे पोस्ट कर पाएंगे. इसके लिए आपको कोई ब्लॉग या वेबसाइट बनाने की कोई जरूरत नहीं होगी.’

टेक वेबसाइट फोन डॉग के मुताबिक गूगल के इस एप में प्रकाशित की गई खबरें सार्वजनिक रहेंगी और इन्हें गूगल सर्च इंजन के द्वारा खोजा जा सकेगा. इसके अलावा इन खबरों को सोशल मीडिया पर साझा करने के साथ-साथ ईमेल और मैसेजिंग एप के जरिए किसी और के पास भी भेज सकते हैं.

गूगल ने अभी इस एप को केवल ऑकलैंड, कैलिफोर्निया और नैशविल में टेस्टिंग के मकसद से लांच किया है. लेकिन, जल्द ही इसके भारत सहित कई अन्य देशों में भी लांच किए जाने की संभावना जताई गई है.

गूगल क्रोम पर अब आप किसी भी वेबसाइट को हमेशा के लिए ‘म्यूट’ कर सकते हैं

गूगल ने अपने यूजर्स को एक बड़ी सहूलियत दी है. कंपनी ने अपने बहुचर्चित क्रोम ब्राउजर के नए अपडेट के साथ एक नया फीचर लॉन्च किया है जो ऑटो प्ले होने वाले वीडियो से निजात दिलाएगा. इस फीचर के जरिये क्रोम ब्राउजर पर किसी भी वेबसाइट को हमेशा के लिए म्यूट किया जा सकता है. यानी इसके बाद आप जब भी उस वेबसाइट खोलेंगे तो इस पर चलने वाले वीडियो का साउंड आपको नहीं सुनाई देगा.

गूगल के अनुसार विंडोज, मैक और लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए उपलब्ध इस नए फीचर को काफी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए यूजर को अपने ब्राउजर में खुली वेबसाइट के टैब पर राइट क्लिक करना होगा और इसके बाद उसे उस वेबसाइट को म्यूट करने का विकल्प मिलेगा. हालांकि, क्रोम ब्राउजर पर इससे पहले भी ऐसा ही एक फीचर (म्यूट टैब) था लेकिन, उससे स्थायी रूप से किसी वेबसाइट को म्यूट नहीं किया जा सकता था.

गूगल ने यह फैसला क्रोम के यूजर्स की परेशानी देखते हुए लिया है. बीते समय में लोग यह शिकायत करते रहे हैं कि जब वे ब्राउजर पर एक से ज्यादा वेबसाइट खोल कर रखते हैं तो कई वेबसाइटों में मौजूद वीडियो अपने आप चलने लगते हैं. (विस्तार से)

चीन को बंदरों की क्लोनिंग में सफलता मिली; क्या अब इंसानों की क्लोनिंग भी संभव है?

चीन बंदरों की क्लोनिंग में सफलता हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. यह उपलब्धि शंघाई स्थित चाइनीज अकादेमी ऑफ साइंस इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस के वैज्ञानिकों को मिली है. चीन के इस संस्थान में करीब छह हफ्ते पहले जोंग जोंग और हुआ हुआ नाम के दो बंदरों का क्लोनिंग तकनीक से जन्म हुआ है. लंबी पूंछ वाले मकैक प्रजाति के ये बंदर समरूप जुड़वा (आइडेंटिकल ट्विन्स) हैं.

चाइनीज अकादेमी ऑफ साइंस से जुड़ी वैज्ञानिक मुमिंग पू ने इस उपलब्धि पर कहा, ‘मनुष्य भी वानर प्रजाति में आते हैं... इस तरह हमने बंदरों की क्लोनिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी बाधा पार कर ली है. यह बाधा पार करने की वजह यह है कि हम ऐसे जानवरों के मॉडल तैयार करना चाहते हैं जिन पर मनुष्यों के लिए उपयोगी दवाओं का परीक्षण किया जा सके. हालांकि इस तकनीक को मनुष्यों के लिए इस्तेमाल करने का हमारा कोई इरादा नहीं है.’

चीनी वैज्ञानिकों ने बंदरों की क्लोनिंग के लिए उसी तकनीक का इस्तेमाल किया है जिसके जरिए 20 साल पहले डॉली नाम की भेड़ का जन्म हुआ था. 1996 के दौरान स्कॉटलैंड के रोज़लिन इंस्टिट्यूट में जीव विज्ञानी इयान विल्मुट के नेतृत्व में दुनिया की पहली क्लोन भेड़ डॉली का जन्म हुआ था. तब इसे चिकित्सा विज्ञान की क्रांतिकारी खोज माना गया था.

क्लोनिंग क्या है : किसी जीवित या पहले जीवित रहे जीव-जंतु के जैनेटिक पैटर्न की तर्ज पर हूबहू वैसे ही जैनेटिक पैटर्न वाले दूसरे जीव को विकसित करने की प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है. किन्हीं दो समरूप जुड़वां लोगों में यह जैनेटिक पैटर्न एक सा होता है और इसी के चलते ऊपरी तौर पर भी वे एक जैसे दिखते हैं.