रेलवे को उसकी दुर्दशा से उबारने के लिए मोदी सरकार इसमें भारी पूंजी निवेश की योजना बना रही है. लोकसभा सांसद सुदीप बंधोपाध्याय के नेतृत्व वाली और रेलवे पर संसद की स्थायी समिति को सौंपी गई अपनी एक रिपोर्ट में मंत्रालय ने बताया है कि 2032 तक रेलवे का कायापलट करने के लिए 35.3 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा. इस योजना को पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु के समय आधुनिकीकरण पर 8.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना का विस्तार बताया जा रहा है. कल पेश होने वाले 2017-18 के आम बजट में इस बारे में कोई ऐलान होने की संभावना है.

रेल मंत्रालय ने संसदीय समिति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अगले 15 सालों में होने वाला यह निवेश रेलवे के आधुनिकीकरण, क्षमता-विस्तार और संरक्षा की विभिन्न योजनाओं पर खर्च किया जाएगा. रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने दावा किया है कि इतने बड़े पैमाने पर निवेश होने से आने वाले समय में रेलवे की दशा काफी बेहतर हो जाएगी. उन्होंने यह दावा भी किया है कि नए बजट में नई रेल लाइनें बिछाने और पुरानी लाइनों के आधुनिकीकरण के अलावा दोहरीकरण की कई परियोजनाओं का भी ऐलान किया जाएगा. इस अधिकारी के अनुसार 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से पूरे रेलवे की सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की योजना की घोषणा इस बजट में हो सकती है. देश की सभी रेल लाइनों के भी पूर्ण विद्युतीकरण के बारे में किसी स्पष्ट ‘डेडलाइन’ का भी ऐलान हो सकता है. इसके अलावा एक लाख करोड़ रुपये की लागत से देश के सैकड़ों रेलवे स्टेशनों के कायाकल्प की योजना भी बजट में पेश की जा सकती है.

हालांकि रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में पहला सबसे बड़ा कदम 2015-16 के रेल बजट में उठाया गया था. उस समय तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए ‘विजन 2030’ का खाका पेश किया था. उन्होंने तब ऐलान किया था कि पहले पांच सालों (2015 से 2020 तक) के दौरान रेलवे में 8.56 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इस निवेश की खासियत यह बताई गई थी कि सरकार से मिलने वाली बजटीय सहायता पर रेलवे की निर्भरता धीरे-धीरे घटाई जाएगी. वहीं आंतरिक संसाधनों और रेलवे द्वारा लिए गए कर्ज की मात्रा बढ़ाई जाएगी.

वैसे कई जानकार पिछले तीन सालों में (2015-16 से 2017-18 के बीच) पूंजी निवेश की मात्रा को लक्ष्यपूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं मान रहे हैं. वित्त वर्ष 2015-16 में रेलवे में 93.5 हजार करोड़ रुपये का ही पूंजी निवेश हो पाया था. वहीं 2016-17 और 2017-18 के बजट में इसे क्रमश: 1.21 और 1.31 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव पेश किया गया था. उधर हाल ही में वित्त मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष में रेलवे को मिलने वाली बजटीय सहायता में 15 हजार करोड़ रुपये की कटौती करने का ऐलान किया है. इससे पूरी आशंका है कि बीते तीन सालों में रेलवे का वास्तविक खर्च 3.45 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से भी कम रहेगा. ऐसा होने पर पांच साल का निवेश लक्ष्य पाने के लिए रेल मंत्रालय को अगले दो साल में पांच लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का निवेश करना पड़ेगा. कई आलोचक ऐसे में इस लक्ष्य को पाना रेलवे के लिए मुश्किल मान रहे हैं.

हालांकि कई विश्लेषक यह जरूर कह रहे हैं कि यदि निवेश की नई योजना का ऐलान हुआ तो इससे रेलवे के सालाना पूंजीगत खर्च में कई गुना की बढ़ोतरी हो जाएगी. 2014-15 में जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी तो रेलवे का पूंजीगत खर्च केवल 58,719 करोड़ था. अनुमान है कि पांच साल बाद यानी 2019-20 में यह बढ़कर करीब तिगुना हो सकता है. वैसे 15 सालों के प्रस्तावित निवेश का औसत निकालें तो कुछ ही साल में रेलवे में सालाना निवेश के चौगुने से भी ज्यादा हो जाने का अंदाजा है.

प्रस्तावित निवेश योजना ‘विजन 2030’ का विस्तार है!

फरवरी 2015 में पेश रेल बजट में सुरेश प्रभु ने ‘विजन 2030’ का ऐलान किया था. उससे करीब दो माह पहले ही केंद्र सरकार के नए थिंक टैंक नीति आयोग का गठन हुआ था. बाद में उसने सरकार से सिफारिश की कि वित्त वर्ष 2017-18 से पंचवर्षीय योजना के बजाय 15 सालों की दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाकर उसके अनुसार चला जाए. जानकारों का मानना है कि रेल मंत्रालय का नया निवेश प्रस्ताव ‘विजन 2030’ में किया गया दो साल का विस्तार है. पीयूष गोयल के रेल मंत्री बनने के बाद इस कार्ययोजना को अंतिम रूप लगभग ​दे दिया गया है. सूत्रों के अनुसार केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट में इस बारे में भी ऐलान कर सकते हैं.

इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी ने रेलवे की बदतर दशा का हवाला देते हुए कहा था कि बिना निवेश बढ़ाए इसकी समस्याएं दूर नहीं की जा सकतीं. उन्होंने तब वादा किया था कि यदि उनकी सरकार आई तो रेलवे का कायाकल्प कर दिया जाएगा. लेकिन आलोचकों का मानना है कि पिछले साढ़े तीन साल में मोदी सरकार के तमाम दावों के बावजूद रेलवे की हालत में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि कई जानकार मानते हैं कि इसकी समस्याएं काफी गहरी हैं, लिहाजा भारी-भरकम राशि और काफी वक्त देने के बाद ही इन्हें दूर किया जा सकता है.