दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद भारतीय टीम ने वनडे सीरीज में शानदार शरुआत की है. उसने छह मैचों की वनडे सीरीज के शुरुआती दो मैच जीत लिए हैं.

हालांकि, अगर भारत के विदेशी दौरों का इतिहास देखें तो भारतीय टीम के लिए दक्षिण अफ्रीकी टीम एक अबूझ पहेली जैसी नजर आती है. वनडे और टेस्ट दोनों फ़ॉर्मेट में ही भारत का जितना खराब रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका में उसकी टीम के खिलाफ दिखता है, उतना किसी और टीम के खिलाफ नहीं दिखता. दक्षिण अफ्रीका एक मात्र ऐसा देश है, जहां अब तक भारत ने न तो वनडे और न ही कोई टेस्ट सीरीज जीती है. वनडे के मामले में काफी अरसे तक न्यूजीलैंड के साथ भी भारत का ऐसा ही रिकॉर्ड था, लेकिन 2008-09 के दौरे पर महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में भारत ने न्यूजीलैंड को उसकी धरती पर सीरीज हराने में कामयाबी पा ली थी.

दक्षिण अफ्रीका की बात करें तो साल 1992 से लेकर अब तक भारतीय टीम ने यहां चार वनडे (द्विपक्षीय) और दो त्रिकोणीय सीरीज खेली हैं. लेकिन, वह इनमें से किसी में भी जीत हासिल नहीं कर सकी. इस दौरान उसने दक्षिण अफ्रीका की जमीन पर उसके खिलाफ कुल 29 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें से उसे केवल छह में जीत मिल पाई है.

लेकिन, इस तरह के इतिहास के बावजूद पिछले दो सालों में भारतीय टीम ने जिस तरह का असाधारण प्रदर्शन किया है और कोई वनडे सीरीज नहीं हारी, उससे इस बार उसका दावा भी काफी मजबूत दिखता है. क्रिकेट विश्लेषकों के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीकी टीम के कोच और कप्तान का भी मानना है कि यह भारतीय टीम अब तक की सबसे बेहतर टीम है जो उन्हें कड़ी टक्कर देगी.

भारतीय गेंदबाजी सबसे बड़ा फैक्टर

सुनील गावस्कर और कृष्णमाचारी श्रीकांत सहित भारतीय क्रिकेट के कई पूर्व दिग्गज कहते हैं कि इस बार भारतीय टीम के पास अफ्रीका में सीरीज जीतने का बेहतरीन मौका है. इनके मुताबिक इस टीम और पिछली भारतीय टीमों में सबसे बड़ा अंतर गेंदबाजी मोर्चे का है. इससे पहले अफ्रीका दौरे पर जो टीमें गईं उनमें उस समय के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज थे. लेकिन, गेंदबाजी मोर्चे पर कमजोर होने की वजह से टीम बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती थी. यही कारण था पिछले दौरों पर मुकाबला भारतीय बल्लेबाजी और अफ़्रीकी गेंदबाजी के बीच होता था. एक आम धारणा थी कि अगर बल्लेबाज चले तभी भारतीय टीम जीत सकती है.

ये दिग्गज कहते हैं कि अब भारत के पास जो गेंदबाजी आक्रमण है उसने इस धारणा को काफी हद तक बदला है. हाल ही में गेंदबाजों ने टेस्ट सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन करके भी दिखाया है. अफ्रीका में पहली बार भारतीय गेंदबाजों ने सीरीज के हर मैच की हर इनिंग में अफ़्रीकी टीम को ऑल आउट किया है.

पहले वनडे की पूर्व संध्या पर दक्षिण अफ्रीकी कप्तान फॉफ डू प्लेसिस भी इसी को लेकर चिंतित नजर आए. डू प्लेसिस का कहना था, ‘भारतीय गेंदबाजों ने टेस्ट सीरीज में लगातार जिस तरह की गेंदबाजी की उसे देखकर हम सब चकित थे. भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाजों के अलावा बुमराह ने भी लाजबाव गेंदबाजी की.’ अफ़्रीकी कप्तान आगे कहते हैं कि वनडे में तो भारतीय टीम के पास कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल जैसे आक्रामक स्पिनर भी हैं, ऐसे में भारतीय गेंदबाजी वनडे फ़ॉर्मेट में टेस्ट से भी ज्यादा बेहतर दिख रही है.

हालांकि, जैसा कहा जा रहा था कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल ने शुरूआती दोनों मैचों में वैसी ही गेंदबाजी की. पहले मैच में दोनों ने ही सधी हुई गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट झटके. जबकि, दूसरे वनडे में चहल ने पांच और कुलदीप ने तीन खिलाड़ियों को आउट कर अफ़्रीकी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. खास बात यह थी कि दोनों ही मैचों में इन दोनों के कारण ही अफ्रीकी बल्लेबाज कोई बड़ी साझेदारी नहीं कर पाए.

इस सीरीज में गेंदबाज निर्णायक भूमिका में इसलिए भी नजर आ रहे हैं क्योंकि बल्लेबाजी के मामले में दोनों ही टीमों की स्थिति एक जैसी दिखती है. इसका पता इस बात से भी चलता है कि वर्तमान में दुनिया के सबसे बेहतर 14 बल्लेबाजों में से 08 इस सीरीज में खेल रहे हैं. इनमें दोनों ही टीमों के चार-चार बल्लेबाज शामिल हैं. ऐसे में दोनों ही टीमों से बेहतर बल्लेबाजी की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, एबी डिविलियर्स और फॉफ डू प्लेसिस का न खेल पाना भारत के लिए सुखद खबर है. जहां चोट के कारण डिविलियर्स सीरीज के पहले तीन मैचों में टीम का हिस्सा नहीं हैं. वहीं, कप्तान डू प्लेसिस भी चोट की वजह से ही पूरी वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं.

महेंद्र सिंह धोनी की उपस्थिति एक बड़ा अंतर पैदा करेगी

पिछले हफ्ते खत्म हुई टेस्ट सीरीज के दौरान सुनील गावस्कर का एक बयान काफी चर्चा में रहा था जिसमें उनका कहना था, ‘काश, आज इस टीम में महेंद्र सिंह धोनी होते, ड्रेसिंग रूम में जिनकी सलाह अनमोल है.’ गावस्कर के इस बयान के पीछे की मुख्य वजह यह थी कि टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को देखते हुए भारतीय टीम को अब तक की सबसे संतुलित टीम बताया गया था. कइयों का मानना था कि यह टीम इस बार अफ्रीका में कुछ बड़ा करेगी. लेकिन, इसके बावजूद वह बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रही. एक आम राय है कि सीरीज के दौरान कप्तान कोहली के कुछ फैसले ऐसे थे जिन्होंने इस हार में बड़ी भूमिका निभाई.

अब वनडे सीरीज से पहले भी भारतीय टीम के पक्ष में वही बातें कही जा रही हैं, जो टेस्ट सीरीज से पहले कही गई थीं. लेकिन, कई जानकारों का मानना है कि विराट कोहली वनडे में वैसी गलतियां नहीं कर पायेंगे जो उन्होंने टेस्ट सीरीज के दौरान की थीं. इसका बड़ा कारण वनडे टीम में पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का होना है. खिलाड़ियों के साथ-साथ उनकी सलाह पर कोच और कप्तान भी काफी भरोसा करते हैं.

बहरहाल, इन तमाम रिकॉर्डों पर नजर डालें तो इतिहास का पलड़ा जहां अफ्रीका की ओर झुका नजर आता है, वहीं वर्तमान में भारत उससे मजबूत दिखता है. हालांकि, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली की जोड़ी को इतिहास बदलने के लिए भी जाना जाता है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जिस तरह इनके रहते भारतीय टीम ने 2015 के विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका को हराकर विश्वकप मैचों में उससे कभी न जीतने का इतिहास बदला था, वैसे ही ये इस बार भी इतिहास बदल कर दिखाएंगे.

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