संसद में पेश बजट-2018 पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट-2018 को देश की नींव को मजबूत करने वाला बजट बताया. उन्होंने कहा कि यह किसान, सामान्य जनता, कारोबारियों और विकास हितैषी है. प्रधानमंत्री ने किसानों का विशेष ख्याल रखने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को बधाई भी दी. उन्होंने यह भी कहा, ‘यह बजट भारत के विकास में तेजी लाएगा. इसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबार करने में सरलता) के साथ ईज ऑफ लिविंग (जीवन जीने में सरलता) पर भी ध्यान दिया गया है.’

वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आम बजट को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि 10 करोड़ परिवारों के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा बहुत बड़ी पहल है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की प्रशंसा की. केंद्र सरकार को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा कदम है, क्योंकि इससे 10 करोड़ गरीब परिवारों को मदद मिलेगी. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बजट-2018 को महाबजट बताया. उन्होंने कहा कि इसमें गरीबों, किसानों और आदिवासियों के लिए बहुत सारी घोषणाएं है. उनके मुताबिक यह बजट भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में मजबूत करेगा.

हालांकि, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बजट-2018 को नजरों का धोखा बताया है. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि अगर सरकार किसानों और वंचित तबके को लेकर चिंतित है तो इसे यह बजट 2014-15 में पेश करना चाहिए था, जब सरकार के पास पांच साल थे. वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा कि वित्त मंत्री ने किसानों के लिए सुधार करने की कोशिश की है, लेकिन किसानों और ग्रामीण आबादी की समस्याएं बहुत ज्यादा है, इसलिए ये घोषणाएं अपर्याप्त साबित हो सकती हैं.

उधर, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने बजट में बिहार के लिए कुछ न होने का आरोप लगाया. ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘बिहार को विशेष पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे पर कुछ भी नहीं मिला. नीतीश कुमार बताएं कि क्या यही उनके लिए डबल इंजन है?’ तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि अगर सरकार को किसानों की इतनी ही चिंता है तो उनका कर्ज क्यों नहीं माफ कर दिया?

हालांकि, विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने विपक्ष पर निराशावादी होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री के एक घंटा 45 मिनट के बजट भाषण में एक घंटा गरीबों के लिए था. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस भूल रही कि उसने 2009 में चुनाव से पहले राजकोषीय घाटे को 2.9 फीसदी से पांच फीसदी तक बढ़ जाने दिया था.’ पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि अगर यही वित्तीय समझदारी है तो मोदी सरकार ने भारत में इसकी नई परिभाषा दी है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आगामी वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 फीसदी रहने का लक्ष्य रखा है.