गणतंत्र दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के कासगंज में फैली सांप्रदायिक हिंसा के पीछे क्या कोई साज़िश थी? यह सवाल उत्तर प्रदेश के पुलिस प्रमुख ओपी सिंह के डीएनए को दिए साक्षात्कार के बाद सामने आया है.

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सिंह ने कहा है, ‘हम मामले की जांच कर रहे हैं. इसके लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया गया है. विशेष कार्य बल (एसटीएफ़) भी एसआईटी की मदद कर रहा है. जांच में हम इस पहलू पर भी ध्यान दे रहे हैं कि कहीं हिंसा के पीछे साज़िश तो नहीं थी.’ सिंह के मुताबिक़, ‘घटना अचानक हुई. बिना इज़ाज़त निकाली जा रही तिरंगा यात्रा एक ख़ास इलाके में पहुंची जहां सभी समुदायों के लोग रहते हैं. यहां कुछ लोगों ने यात्रा निकालने पर आपत्ति की. इस पर दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई. इसके बाद उनके बीच पहले पत्थरबाज़ी हुई. फिर गोलियां चल गईं. इसमें एक युवक की मौत हो गई. जबकि एक अन्य घायल हो गया.’

ग़ौरतलब है गणतंत्र दिवस पर कासगंज में विश्व हिंदू परिषद, हिंदू महासभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने मोटर साइकिलों पर तिरंगा यात्रा निकाली थी. इस यात्रा के दौरान भड़की हिंसा में चंदन गुप्ता नाम के एक शख़्स की मौत हो गई थी. अगले दिन गुप्ता के अंतिम संस्कार के बाद फिर हिंसा भड़क उठी थी. इसमें तीन दुकानें, दाे बसें और एक कार जला दी गई थी. पुलिस ने इस मामले में दर्जन भर से ज्यादा लोगों को पकड़ा है. बुधवार को उस व्यक्ति को भी ग़िरफ़्तार कर लिया गया जिसकी गोली से गुप्ता की मौत हुई थी.