आपका नाम क्या है?

हमारा नाम करणी सेना है.

मैं आपके संगठन का नहीं, आपका नाम पूछ रही हूं.

अरे, हमारे नाम में क्या रखा है मैडम. हमारे नाम में इतनी बात होती तो कहने ही क्या थे! हमारा तो नाम ही करणी सेना से जुड़ने के बाद हुआ और इत्ता हुआ कि क्या ही कहें, तब से होश नहीं पड़ रहे. कभी टीवी वाले, कभी अखबार वाले... और अब आप आई हैं हमसे बात करने.

अच्छा, यह बताइये कि करणी सेना का गठन कब हुआ था?

(असमंजस से) आप प्रैक्टिकल के समय थ्योरी क्यों पूछ रही हैं!...अरे, ये सब किताबी चीजें तो आप लोगों को ही ज्यादा पता होती हैं. हमें सिर्फ व्यावहारिक चीजें पता होती हैं, क्योंकि हम फील्ड के लोग हैं न. आप हमसे ये पूछो कि करणी सेना ने कब, कहां और कितनों को फोड़ा, हम तुरंत बता देंगे...कब, कहां आगजनी की, कितनों को धुना, कितनी बसें, कारें जलाईं...कसम से हम जरा देर नहीं लगाएंगे ये बताने में...मेरा मतलब है कि फील्ड के लोगों को यही सब पता होता है.

आप करणी सेना से कब जुड़े?

पद्मावती के जन्म के समय!...मतलब जब पद्मावती फिल्म बननी शुरू हुई थी, तभी हम नये-नये जुड़े थे. पद्मावती बनने के शुरू में ही जब भंसाली की जयपुर में पिटाई हुई थी, तब मैं भी उसमें था. एक थप्पड़ मैंने भी मारा था भंसाली को. (जोश से) कसम से कई दिनों तक तो मैं इसी खुशी में ही बौराया रहा कि मैंने इतने बड़े फिल्ममेकर को ऐसे थप्पड़ जड़ दिया, जैसे मास्टर बच्चों को मारता है. ऐसा बड़ा मौका क्या मुझे कोई और संगठन दे सकता है भला, जैसा करणी सेना ने दिया? कतई नहीं!

फिल्म का नाम बदलने के बाद भी आप लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

क्या शराब की बोतल पर पानी का लेबल चिपकाने से उसका नशा खत्म हो जाएगा!

क्या आपने पद्मावत फिल्म देखी है?

(दबी आवाज में) सच्ची बताऊं! देखी तो नहीं, पर टीवी में दीपिका पादुकोण को देख-देख के मन तो बहुत करता है फिलम देखने का. पर हमीं लोगों के डर से, हमारे राज्य में कोई ये फिलम अपने हॉल में लगाने को ही राजी नहीं है!

जब आपने फिल्म देखी ही नहीं और फिल्म का सच जानते ही नहीं, तो फिर उसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

हम राजपूत लोग, बेटियों का मुंह देखने से पहले कार्रवाई कर देते हैं! और वैसे भी विरोध का सच से क्या लेना देना...

फिर किससे लेना-देना है?

(बगलें झांकते हुए) ये तो मुझे भी नहीं पता!...अब्ब्ब...मेरा मतलब है कि हमारा काम तो बस विरोध करना है. कब करना है, क्यों करना है, कैसे करना है, कहां करना है, कितना करना है, इस सबमें हम घुटना नहीं लगाते... समझी नहीं आप. अरे दिमाग तो घुटनों में ही आ गया है न हमारा! (हंसते हुए)

आप किन-किन चीजों का विरोध करना चाहते हैं?

देखो मैडम, हम सच्चे विरोधी हैं. और एक सच्चा विरोधी ये नहीं देखता कि इस चीज का विरोध करना है, उसका नहीं. हम तो बस विरोध में पिल पड़ते हैं!

आपको हिंदुस्तान के इतिहास की कितनी जानकारी है?

मुझे करणी सेना का इतिहास तो पता नहीं ठीक से, आप हिंदुस्तान के इतिहास की बात कर रही हैं! ...मेरा मतलब ये है कि मैं तो इतिहास के पेपर में ही मुश्किल से पास हुआ था. क्योंकि न तो मुझे तारीखें याद रहती हैं और न आज तक ये पता चला है कि अकबर, बाबर, हुमायूं, शाहजहां में से कौन किसका बाप-बेटा था!

करणी सेना ने जिन चार इतिहासकारों को फिल्म देखने भेजा था, उनमें से दो ने तो साफ तौर पर कहा है कि फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं जो किसी वर्ग विशेष की भावनाएं आहत करता हो. फिर आप लोग फिल्म का इतना हिंसक विरोध क्यों कर रहे हैं?

इसके दो कारण हैं. एक तो ‘जोधा-अकबर’ फिल्म के समय भी हमारी सेना ने फिल्म को बैन करवाने की कोशिश की थी, पर वो सफल नहीं हुई. इस कारण करणी सेना की हार की यह भावना रोष में बदल गई, और अब तीगुनी ऊर्जा से उसकी वापसी हुई है. दूसरा आरक्षण वाला धंधा भी आजकल मंदा ही है! तो ऐसे में करणी सेना के जवानों की ऊर्जा में कहीं जंग न लग जाए, इस कारण उन्हें इस काम में भी लगाया गया है.

लेकिन करणी सेना तो अपनी ऊर्जा का दुरुपयोग कर रही है!

विस्फोटक ऊर्जा का पूरी दुनिया में आज तक कहीं सदुपयोग हुआ है, जो हम करेंगे! देखिये, करणी सेना को आप एक लोकल किसम का न्यूक्लियर बम मान लीजिये, जिसे साधनों के अभाव के बावजूद हमने बड़ी मेहनत से तैयार किया है...और ऐसे बमों का आज तक दुनिया में कितना सदुपयोग हुआ, कितना दुरुपयोग, ये आप हमसे ज्यादा ही जानती होंगी. तो फिर हम इसके अपवाद कैसे हो सकते हैं.

करणी सेना के एक नेता का कहना था कि वे महिलाओं पर हाथ नहीं उठाते, लेकिन दूसरी तरफ वे दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी दे रहे थे. इस पर आपका क्या कहना है?

राजपूत महिलाओं पर हाथ नहीं उठाते, बस जौहर करवाते हैं! अब्ब्ब.. मैं कहना चाहता हूं कि महिलाओं के शरीर में इतनी सारी नाक चिपकी होती हैं, एक साथ कि वे ऊपर से नीचे तक एक बड़ी सी नाक से ज्यादा और बचती ही क्या हैं! और नाक तो भगवान ने भी सिर्फ कटने-काटने के लिए ही बनाई है. हम नहीं काटेंगे तो कोई और काटेगा. उनकी नहीं कटेगी तो किसी और की कटेगी, पर कटेगी जरूर!

‘महिलाएं नाक से ज्यादा बचती ही क्या हैं’ इसका क्या मतलब है?

अरे मेरा मतलब है कि सबसे पहले तो महिलाओं की खुद की एक नाक होती है, फिर पिता की नाक भी तो उन्हीं में चिपकी होती है. ऐसे ही मां की नाक, भाई की नाक, चाचा-ताऊ की नाक, परिवार की नाक, रिश्तेदारों की नाक, जाति-बिरादरी की नाक, समाज की नाक, देश की नाक, इसकी नाक, उसकी नाक.....मतलब कुल मिलाकर नाक ही नाक! आप कल्पना कर ही सकती हैं कि इतनी सारी अलग-अलग साइज की नाकें जब एक इंसान के शरीर पर चिपकी हों परमानेंट, तो वह इंसान एक बड़ी सी नाक से अलग भला बचता ही क्या है!

अच्छा, यह बताइये कि पद्मावत फिल्म का विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद करणी सेना क्या करेगी?

देखिए, हमारी सेना के कामकाज को देखते हुए पूरे देश में इसकी इतनी मांग है कि चुनावों के आते-आते तो हम ब्याह-शादी के लिए छुट्टी पर भी नहीं जा सकेंगे.

आप लोग फिल्म के विरोध में हिंसक प्रर्दशन ही क्यों कर रहे हैं, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन भी तो हो सकता है.

वो प्रदर्शन ही क्या जिसमें हिंसा न हो! राजपूत प्रदर्शन कर रहे हैं, असहयोग आंदोलन नहीं!

क्या आपको लगता है कि फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ हुई है?

इतिहास के साथ छेड़छाड़ से दिक्कत नहीं है, लेकिन रानी पद्मावती के साथ छेड़खानी हम बर्दास्त नहीं करेंगे.

एक आखिरी सवाल. जब आपको किसी सेना में ही भर्ती होना था तो आप तीनों भारतीय सेनाओं में से किसी एक में भर्ती क्यों नहीं हुए?

तीन सेनाओं में से ही तो एक है ये करणी सेना!

क्या मतलब?

अरे मतलब देश में तीन ही तो सेनाएं हैं, जिनका आजकल सबसे ज्यादा नाम है. शिव सेना, करणी सेना और हिन्दू सेना!