श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना (एसआरआरकेएस) द्वारा ‘पद्मावत’ के ख़िलाफ़ अपना विरोध वापस लेने की ख़बर आज मीडिया और सोशल मीडिया पर कई जगह बार-बार दिखी है. लगभग हर बड़े संस्थान ने इस ख़बर को दिखाया है. हालांकि यह कितनी सही है इसे लेकर कोई दावा करना जल्दबाज़ी होगी, क्योंकि सभी माध्यमों से आ रही जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल एक चिट्ठी से काफ़ी हद तक मिलती-जुलती है.

इस चिट्ठी में एसआरआरकेएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष योगेंद्र सिंह कटार के हवाले से कहा गया है, ‘हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के निर्देशानुसार हमने आज (दो फ़रवरी) पद्मावत फ़िल्म देखी. हमें यह बताते हुए गर्व महसूस हो रहा है कि फ़िल्म में राजपूतों की वीरता और त्याग का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है. यह फ़िल्म रानी पद्मावती की महानता को समर्पित है... फ़िल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई दृश्य नहीं हैं. इस फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जो राजपूत इतिहास और मान्यताओं को नुक़सान पहुचाए... हम इस फ़िल्म से पूरी तरह संतुष्ट हैं. इसलिए हम हमारा आंदोलन/विरोध बिना शर्त वापस ले रहे हैं और आपको आश्वासन देते हैं कि हम इस फ़िल्म को राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और भारत के सभी सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने में मदद करेंगे.’

मीडिया में ज्यादातर जगह एक न्यूज़ एजेंसी के हवाले से यह खबर दिखाई जा रही है. इसमें वही जानकारी है जो करणी सेना की चिट्ठी में दी गई है. सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी चिट्ठियों के ज़रिए सुर्ख़ियां बटोरना नई बात नहीं है, इसलिए इस ख़बर को लेकर हमने अपने स्तर पर एक छानबीन की और इससे लगता है कि यह खबर सही नहीं है.

करणी सेना के पत्र में संगठन के उच्च पदाधिकारियों के नाम और उनके फ़ोन नंबर दिए गए हैं. सत्याग्रह ने इन सभी से बात करने का प्रयास किया, लेकिन किसी का फ़ोन बंद है तो कोई पहुंच से बाहर है. एक नंबर मिला लेकिन उसे रिसीव नहीं किया गया. दो पदाधिकारियों नारायण सिंह और उम्मेद सिंह से वॉट्सएप के ज़रिए इस पत्र की सच्चाई पर सवाल पूछा गया है लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं मिला. करणी सेना की वेबसाइट पर भी ऐसी कोई जानकारी नहीं है.

उधर, राजपूत करणी सेना के नाम से चलाए जा रहे ट्विटर हैंडल #ShriKarniSena ने इसे फ़र्जी़ ख़बर बताया है. यह हैंडल खुद को करणी सेना का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बताता है. इसके एक ट्वीट में कहा गया है, ‘सोशल मीडिया पर फ़र्ज़ी ख़बरें जल्दी फैलती हैं, फैलाई जाती हैं. युवा और वरिष्ठ संयम से काम लें. (पद्मावत को लेकर) हमारा विरोध था और आगे भी रहेगा. लेटरपैड से गुमराह करते हुए समाज विरोधी बचकाना हरकत करने वाले शख़्स को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. आज 3:30 बजे सुखदेव सिंह गोगामेड़ी प्रेस से रूबरू होंगे.’ हालांकि अब तक ऐसी किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस की खबर न तो मीडिया में है और न ही इस ट्विटर हैंडल पर.

एक और ट्वीट में विरोध वापस लेने की ख़बर को झूठ बताते हुए कहा गया है, ‘न तो सुखदेव सिंह जी ने, न ही योगेन्द्र जी कटार, न ही श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना मुंबई इकाई अध्यक्ष मदन सिंह जी राजकीयावास ने पद्मावत फ़िल्म देखी, न ही इसे रिलीज की हरी झंडी दी. हमारा विरोध था और आगे भी रहेगा.’

वहीं, पद्मावत के विरोध की अगुवाई कर रहे लोकेंद्र सिंह कालवी ने साफ़ कह दिया है कि करणी सेना के विरोध वापस लेने की ख़बर झूठी है. उन्होंने कहा कि वायरल चिट्ठी से करणी सेना का कोई लेना-देना नहीं है और करणी सेना की किसी ‘डुप्लीकेट कॉपी’ ने फ़िल्म को हरी झंडी दी है. कालवी ने कहा है कि उनका संगठन अभी-भी फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाने के समर्थन में खड़ा है.