अंडर-19 विश्व कप में जब पिछले हफ्ते भारतीय टीम पाकिस्तान को हराकर फाइनल में पहुंची थी तब टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का एक बयान आया था. उनका कहना था, ‘आज से पांच साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का वह दबदबा बनने जा रहा है जो कभी इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज जैसी टीमों का हुआ करता था.’ गांगुली ने यह बात अंडर-19 विश्वकप में भारतीय खिलाड़ियों को देखकर कही थी.

हालांकि, इससे पहले भी भारत तीन बार यह टूर्नामेंट जीत चुका है और उन टीमों से भी कई होनहार खिलाड़ी भारत को मिले. इरफ़ान पठान, युवराज सिंह, विराट कोहली जैसे कई खिलाड़ी अंडर-19 विश्वकप जीतकर ही भारतीय टीम में पहुंचे थे. लेकिन, गांगुली सहित दुनियाभर के क्रिकेट के कई जानकरों का मानना है कि इस बार की यह भारतीय टीम पिछली अंडर-19 टीमों से कई मायनों में काफी अलग है. इस टीम से एक साथ जितने मैच विनर खिलाड़ी देश को मिले हैं उतने पहले की टीमों से नहीं मिले.

इस विश्व कप में अगर भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन देखें तो इस टीम ने यहां जिस स्तर की क्रिकेट खेली, उसके सामने बाकी टीमें बौनी नजर आईं. इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने छह मैच खेले और किसी मैच में कोई एक ऐसा पल नहीं आया जब लगा हो कि भारतीय टीम विपक्षी टीम से कमजोर है.

आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं. भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में अपना पहला मैच सबसे मजबूत बताई जा रही ऑस्ट्रेलिया से 100 रनों के बड़े अंतर से जीता था. इसके बाद उसने पापुआ न्यू गिनी को 10 विकेट से, जिम्बाब्वे को 10 विकेट से, क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश को 131 रनों से और सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 203 रनों के बड़े अंतर से मात दी थी. इसके बाद फिर फाइनल मुकाबले में उसने ऑस्ट्रेलिया को आठ विकेट से एक-तरफा हराया. इसमें कोई दोराय नहीं कि यहां पूरी टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था. लेकिन इस टूर्नामेंट के जरिए कुछ खिलाड़ियों ने ऐसी चमक बिखेरी है कि अब इनमें से किसी में सचिन तेंदुलकर का अक्स नजर आता है तो किसी में युवराज सिंह का, या फिर इसी टीम के कोच राहुल द्रविड़ का भी.

आइये जानते हैं कि ये उभरते खिलाड़ी कौन हैं जो आने वाले सालों में भारत को क्रिकेट की महाशक्ति बनाने में योगदान देंगे :

पृथ्वी शॉ

अंडर-19 विश्वकप में भारतीय टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ का नाम पहली बार बीते साल जनवरी में चर्चा में आया था. तब उन्होंने 17 साल की उम्र में रणजी के अपने पहले मैच में ही शतक ठोक दिया था. इसके बाद सितम्बर में वे तब फिर चर्चा में छाए रहे जब उन्होंने अपने पहले दिलीप ट्रॉफी मैच में ‘इंडिया रेड’ की ओर से खेलते हुए शानदार 154 रन बनाए. पृथ्वी ने अब तक प्रथम श्रेणी में नौ मैच खेले हैं जिनमें उनके पांच शतक हैं. इस मामले में वे सचिन के 18 साल की उम्र तक प्रथम श्रेणी के मैचों में सात शतक लगाने के रिकॉर्ड से महज दो कदम दूर हैं.

इस विश्व कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है. एक सलामी बल्लेबाज के तौर पर उन्होंने हर बार टीम को ठोस शुरुआत दी. इस कारण आगे आने वाले बल्लेबाजों पर ज्यादा दबाव नहीं बना. शनिवार को हुए फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने पहले विकेट के लिए 71 रनों की साझेदारी की. पृथ्वी ने टूर्नामेंट की पांच पारियों में 94.56 की स्ट्राइक रेट से 261 रन बनाए. पृथ्वी इस साल आईपीएल में भी खेलते दिखाई देंगे. उन्हें दिल्ली डेयरडेविल्स ने एक करोड़ रुपये से ज्यादा की कीमत में खरीदा है.

शुभमान गिल

18 साल के शुभमान गिल पंजाब के फजिल्का के रहने वाले हैं. इससे पहले उन्होंने पंजाब की ओर से अंडर-16 और अंडर-19 स्तर के मैच खेले हैं. वे इस टूर्नामेंट में कुल 372 रन बनाकर भारत की ओर से सबसे सफल बल्लेबाज रहे. उन्होंने इस विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 63 रन, बांग्लादेश के खिलाफ 86, जिम्बाब्वे के खिलाफ 90 और पाकिस्तान के खिलाफ 102 रन बनाए थे. लगातार तीन मैचों में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए शुभमान में सौरव गांगुली और सुनील गावस्कर सहित क्रिकेट के कई दिग्गज युवराज सिंह की छवि देखते हैं. विश्वकप में शानदार प्रदर्शन के चलते शुभमान को आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने 1.80 करोड़ रुपये में खरीदा है.

मनजोत कालरा

शनिवार को फाइनल मुकाबले में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले मनजोत कालरा भी पंजाब से ही आते हैं. मनजोत ने आस्ट्रेलिया के खिलाफ 102 गेंदों पर आठ चौकों और तीन छक्कों की मदद से 101 रन की शानदार पारी खेली है. उन्हें इस शतकीय पारी के लिए मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया. कालरा पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में अर्धशतक बनाने से सिर्फ तीन रनों से चूक गए थे. टूर्नामेंट में छह मैचों की पांच पारियों में उन्होंने 84 के औसत और 89.36 के स्ट्राइक रेट से कुल 252 रन बनाए हैं.

शिवम मावी और कमलेश नागरकोटी

इस विश्व कप का सबसे बड़ा हासिल ये दो तेज गेंदबाज भी माने जा रहे हैं. इन दोनों ने दुनियाभर के क्रिकेट विश्लेषकों को अपनी गेंदबाजी से चौंकाया है. डेल स्टेन को अपना आदर्श मानने वाले शिवम ने इस टूर्नामेंट में जहां 145 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से गेंद फेंकी है, वहीं कमलेश 150 किमी/घंटे के आसपास की रफ्तार से गेंद फेंकने में कामयाब रहे. ये दोनों ही इस पूरे विश्वकप के दौरान विपक्षी बल्लेबाजों के लिए एक अबूझ पहेली बने रहे.

पहले मैच के बाद वेस्टइंडीज के पूर्व खिलाड़ी इयान बिशप का इनके लिए कहना था, ‘मैं अचम्भित हूं...ये लड़के 18 साल की उम्र में ही 145 किमी/घंटा से ज्यादा तेजी से गेंदबाजी कर रहे हैं. जबकि, इन्होंने अभी ज्यादा कुछ सीखा भी नहीं है. मुझे हैरानी इस बात की भी है कि ये भारत की टीम से खेल रहे हैं जिसका तेज गेंदबाजी में इतिहास कोई ख़ास नहीं रहा.’

विश्वकप में कसी हुई गेंदबाजी के साथ नौ-नौ विकेट लेने वाले शिवम और कमलेश हाल ही में हुई आईपीएल की नीलामी के दौरान भी काफी चर्चा में थे. कोलकाता ने उत्तर प्रदेश के नोएडा से आने वाले शिवम को तीन करोड़ में जबकि, राजस्थान के बाड़मेर से ताल्लुक रखने वाले कमलेश को 3.20 करोड़ रुपए की भारी भरकम कीमत में खरीदा है.

शनिवार को भारत के विश्वकप जीतने के बाद एक टीवी कार्यक्रम में पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा कहते हैं, ‘अगर बड़े संदर्भों में देखें तो भारतीय खेल प्रशंसकों को विश्व कप की इस ट्रॉफी से कहीं ज्यादा ख़ुशी इस बात की होनी चहिये कि उन्हें इस टूर्नामेंट से ऐसे कुछ हीरे मिले हैं, जो भविष्य में भारतीय क्रिकेट को एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाने वाले हैं.’ चोपड़ा के मुताबिक इन्हें देखकर कहा जा सकता है कि एमएस धोनी और विराट कोहली की विदाई के बाद वाले समय के लिए हमें चिंतित होने की जरूरत नहीं है.

हालांकि, इस बड़ी जीत में कोच राहुल द्रविड़ की भूमिका भी कम नहीं है, जो आसमान में इन ऊंचीं उड़ने वाली पतंगों की डोर थामे जमीन पर खड़े रहे और इन सबको जमीन से जोड़े रहे. द्रविड़ को इस जीत का श्रेय देते हुए आकाश कहते हैं, ‘भविष्य में ये हीरे जब भी अपनी चमक बिखेरेंगे तब-तब राहुल द्रविड़ नाम के इस जौहरी को भी इन्हें तराशने के लिए याद किया जाएगा.’

क्यों इस बार ज्यादा उम्मीद है कि भारतीय क्रिकेट टीम दक्षिण अफ्रीका में इतिहास बदल पाएगी?