भारत अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर चुका है और इस जीत में टीम के लगभग सभी खिलाड़ियों का योगदान रहा है. वहीं टूर्नामेंट में कुछ खिलाड़ियों का प्रदर्शन ऐसा भी रहा जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा और इनमें से एक इस टीम के कप्तान पृथ्वी शॉ भी हैं. अपनी कप्तानी का जौहर दिखाने के साथ-साथ उन्होंने अपनी सलामी बल्लेबाजी से लगभग हर मैच में एक बेहतर शुरुआत दी जिसने टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई. शनिवार को हुए फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने पहले विकेट के लिए 71 रनों की साझेदारी की. पृथ्वी ने टूर्नामेंट की पांच पारियों में 94.56 के स्ट्राइक रेट से 261 रन बनाए.

भले ही अधिकांश लोगों ने पृथ्वी का नाम इस विश्वकप के दौरान सुना हो, लेकिन वे घरेलू क्रिकेट में पिछले करीब एक साल से धूम मचाए हुए थे.

साल 2017 की जनवरी में जब छोटे से कद के पृथ्वी शॉ का चयन मुंबई की रणजी टीम में हुआ तो कइयों के लिए यह बेहद चौंकाने वाली खबर थी. इसके दो कारण थे - एक तो उनकी उम्र महज 17 साल थी, दूसरा यह मैच कोई साधारण मैच नहीं बल्कि रणजी ट्रॉफी का सेमीफाइनल मुकाबला था. लेकिन, शॉ ने अपने प्रदर्शन से इस चयन को सही साबित किया. उन्होंने अपने इस पहले प्रथम श्रेणी मैच की दूसरी पारी में शानदार शतक लगाकर मुंबई को फाइनल में पहुंचाने में अहम योगदान दिया. इस मैच में उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुना गया.

पृथ्वी शॉ इसके बाद फिर सितम्बर में चर्चा में आए जब उन्होंने अपने पहले दिलीप ट्रॉफी मैच में ‘इंडिया रेड’ की ओर से खेलते हुए शानदार 154 रन बनाए. यह भी कोई आम मैच नहीं बल्कि दिलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला था जिसमें उनकी पारी के चलते ‘इंडिया रेड’ ने खिताब अपने नाम किया.

इस मैच में शतक लगाकर उन्होंने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए. वे सचिन तेंदुलकर के बाद दिलीप ट्रॉफी में शतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए. सचिन ने उनसे 58 दिन पहले यानी 17 साल 262 दिन की उम्र में यह कारनामा किया था. इस उम्र में ऐसे शानदार प्रदर्शन के चलते ही पृथ्वी शॉ की सचिन से तुलना की जाने लगी है. रणजी और दिलीप ट्रॉफी दोनों के अपने पहले मैचों में शतक ठोकने वाले भी ये दो ही हैं. इसके अलावा पृथ्वी ने अब तक प्रथम श्रेणी में नौ मैच खेले हैं जिनमें उनके पांच शतक हैं, इस मामले में भी वे सचिन के 18 साल की उम्र तक सात प्रथम श्रेणी शतक लगाने के रिकॉर्ड से महज दो कदम दूर हैं.

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सचिन तेंदुलकर से पृथ्वी शॉ की तुलना का एक कारण यह भी है कि उन्होंने 2013 में मुंबई के प्रतिष्ठित इंटर स्कूल ‘हैरिस शील्ड’ टूर्नामेंट के एक मैच में 546 रनों की पारी खेली थी. यह वही टूर्नामेंट है जिसके एक मैच में कभी तेंदुलकर ने 326 रन बनाए थे. पृथ्वी इंग्लैंड में भी स्कूल क्रिकेट का बड़ा टूर्नामेंट खेलकर उसमें धमाल मचा चुके हैं. मैनचेस्टर में हुए इस टूर्नामेंट में उन्होंने 84 के औसत से 1,446 रन बनाए थे और पहले मैच में ही शतक जमाया था.

केवल आंकड़े, कद काठी और शालीनता ही नहीं बल्कि पृथ्वी के खेलने का अंदाज भी सचिन से काफी मिलता है. उनका कवर ड्राइव, सीधे बल्ले से बेहतरीन टाइमिंग के साथ किया गया स्ट्रेट ड्राइव और उछलकर गली के ऊपर से गेंद को मैदान से बाहर भेजना सचिन की याद दिलाता है.

पृथ्वी शॉ की एक बड़ी खासियत यह भी है कि उन्हें औरों से अलग बड़े मैच काफी रास आते हैं. रणजी और दिलीप ट्रॉफी के बड़े मुकाबलों के बाद इस नौजवान ने इस साल भारत आई न्यूजीलैंड की टीम के खिलाफ अभ्यास मैच में अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया था. इस मैच में उन्होंने टिम साउथी, ट्रेंट बोल्ट, ईश सोढ़ी और मिचेल सैंटनर जैसे दुनिया के नामी गेंदबाजों का बेधड़क सामना किया और 80 गेंदों में शानदार 66 रन की पारी खेली.

बीते साल दिसंबर में जब पृथ्वी को अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम की कमान सौंपी गई तो मशहूर टायर निर्माता कंपनी ‘एमआरएफ’ ने पृथ्वी के साथ एक अनुबंध साइन किया. एमआरएफ ने इससे पहले केवल सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, स्टीव वा और विराट कोहली जैसे कुछ गिने चुने खिलाड़ियों के साथ ही करार किया है जिसके तहत ये खिलाड़ी अपने बल्ले पर ‘एमआरएफ’ के लोगो का इस्तेमाल करते हैं.

पृथ्वी इस साल आईपीएल में भी खेलते दिखाई देंगे. पिछले महीने हुई आईपीएल की नीलामी में कई टीमों ने उनमें खासी दिलचस्पी दिखाई थी और आखिर में उन्हें दिल्ली डेयरडेविल्स ने एक करोड़ 20 लाख रुपये की कीमत में खरीदा.

पिछले साल जनवरी से लेकर इस साल अंडर-19 विश्व कप तक मैच-दर-मैच अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाने वाले इस बल्लेबाज में उनके प्रशंसक सचिन तेंदुलकर की छवि देखते हैं. साथ ही अधिकांश क्रिकेट विश्लेषक भी मानते हैं कि पृथ्वी उसी फेहरिस्त के खिलाड़ी हैं जिसमें सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली आते हैं और पूरी उम्मीद है कि इन्हीं तीनों की तरह आने वाले सालों में वे भी बहुत बड़े खिलाड़ी बनेंगे.

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