मालदीव में जारी संकट के मद्देनजर भारतीय सेना को हर पल तैयार रहने के आदेश दे दिए गए हैं. ‘द टाइम्स आॅफ इंडिया’ ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. खबर के मुताबिक सेना को आदेश दे दिए गए हैं कि उसे बहुत कम समय में मालदीव रवाना होने के लिए कहा जा सकता है. यानी आपात परिस्थिति पैदा होने पर भारतीय पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों को वहां से निकालने में सेना की मदद ली जाएगी. लेकिन मालदीव में गहराए राजनीतिक संकट के समाधान में भी भारतीय सेना हस्तक्षेप करेगी, यह अभी तय नहीं है.

दूसरी तरफ मालदीव में गहराए राजनीतिक संकट के मद्देनजर वहां के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से एक बार फिर सैन्य और कूटनीतिक मदद की अपील की है. बता दें कि बीते हफ्ते मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने वहां के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को आरोपों से मुक्त कर दिया था और साथ ही सरकार को जेल में बंद नौ अन्य नेताओं को रिहा करने के आदेश दिए थे. मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद यमीन ने कोर्ट के उस आदेश का पालन नहीं किया. उल्टे उन्होंने देश में 15 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी. इससे वहां असुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है.

अभी बीते दिनों मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर भारत से मदद करने का आग्रह किया था. वहां के विपक्षी दल के नेता भी भारत से मदद की आस लगाए हुए हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि भारत ने 1988 में सेना भेजकर मालदीव में तमिल अलगाववादियों की मदद से सत्तापलट की कोशिश नाकाम कर दी थी. विद्रोहियों ने हवाई अड्डे और टेलीविजन स्टेशन समेत कई अन्य सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया था. निराश मालदीव की तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सैन्य सहायता की थी. भारतीय वायुसेना की पैराशूट रेजीमेंट और भारतीय नौसेना ने मिलकर वहां ‘आॅपरेशन कैक्टस’ चलाया था. उस सफल अभियान में भारतीय सेना ने तमिल अलगाववादियों को वहां से खदेड़ दिया था और द्वीप समूह में शांति व्यवस्था कायम की थी. भारत की उस कार्रवाई की तारीफ तब ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों के अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी की थी.