गोवा में खनन कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक बुधवार को अदालत ने इन कंपनियों के खनन पट्टों के नवीनीकरण को खारिज कर दिया. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि गोवा सरकार द्वारा लौह अयस्क खनन के लिए कंपनियों के पट्टों का नवीनीकरण न केवल कानून, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का भी उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में 88 खनन कंपनियों के पट्टों के नवीनीकरण को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया है. गोवा सरकार ने 2015 में दूसरी बार इन कंपनियों का लाइसेंस 20 साल के लिए रिन्यू कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी खनन कंपनियों को 16 मार्च तक खनन रोकने के साथ राज्य सरकार को खनन लाइसेंस देने के लिए नई नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है. अदालत ने केंद्र सरकार को खनन कंपनियों को नई पर्यावरण मंजूरी देने का निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत ने गोवा सरकार को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने और कानून का उल्लंघन कर किए गए खनन के लिए कंपनियों से वसूली करने का भी निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 2012 में गोवा में लौह अयस्क के खनन और परिवहन पर पूर्ण पाबंदी लगा दी थी. अदालत ने जस्टिस एमबी शाह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया था. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दर्जनों खनन कंपनियां लाखों टन लौह अयस्क के अवैध खनन कर रही हैं.