भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने (यूआईडीएआई) ने कहा है कि लैमिनेटेड और प्लास्टिक आधार कार्ड की कोई जरूरत नहीं है. उसने यह भी कहा कि आधार का साधारण कागज पर प्रिंटआउट या फिर मोबाइल आधार का इस्तेमाल सभी जगह मान्य है. यूआईडीएआई के मुखिया अजय भूषण पांडे के मुताबिक प्लास्टिक या लैमिनेटेड आधार कार्ड के साथ यह आशंका भी रहती है कि उसका क्यूआर कोड काम न करे. साथ ही, इससे लोगों का डेटा गलत हाथों में भी पड़ सकता है. आधार को लैमिनेट करवाने या फिर उसका प्लास्टिक कार्ड बनवाने का चलन आम हो चला है. इसके लिए 50 से लेकर 300 रु तक लिए जा रहे हैं.

आधार से डेटा लीक होने की आशंकाओं के बीच हाल में यूआईडीएआई ने वर्चुअल आईडी लाने का भी ऐलान किया था. आधार कार्ड रखने वाला कोई भी शख्स इसे यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाकर बना यानी जेनरेट कर सकता है और इसका इस्तेमाल सिम वेरिफिकेशन जैसे तमाम कामों के लिए कर सकता है. इस आईडी में नाम, पते और फोटो जैसी कुछ बुनियादी जानकारियां ही होंगी जो मोबाइल से लेकर रसोई गैस तक तमाम सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनियों को सत्यापन के लिए चाहिए होती हैं. यानी अब इन कामों के लिए 12 अंकों वाला आधार देने की बाध्यता नहीं रहेगी.

यह वर्चुअल आईडी 16 डिजिट की एक संख्या होगी. अधिकारियों के मुताबिक कोई कितनी भी आईडी जेनरेट कर सकता है. नई वर्चुअल आईडी जेनरेट होने पर पुरानी वाली खत्म हो जाएगी. एक मार्च 2018 से इसे स्वीकार किया जाने लगेगा. अधिकारियों के मुताबिक एक जून 2018 से सभी कंपनियों और विभागों के लिए यह अनिवार्य हो जाएगा कि वे अपने यूजरों से यह वर्चुअल आईडी भी स्वीकार करें. जो इस नई व्यवस्था का पालन नहीं करेंगे उन्हें सरकार की तरफ से वित्तीय प्रोत्साहनों के मोर्चे पर नुकसान झेलना पड़ेगा.