राफेल सौदे पर विपक्ष के हमले के बीच बुधवार को केंद्र सरकार का जवाब आया. एक बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि फ्रांस के साथ हुए इस सौदे की कीमत बताने की विपक्ष की मांग अव्यावहारिक है. मंत्रालय का यह भी कहना था कि सरकार का रुख 2008 में हुए इस सौदे से जुड़े गोपनीयता प्रावधानों के अनुरूप है. इसमें यह भी कहा गया कि कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने भी इस मुद्दे पर यही रुख दिखाया था.

इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि यूपीए के समय हुए इस सौदे की शर्तें बदली गईं और यह काम करने के लिए प्रधानमंत्री खुद पेरिस गए. राहुल गांधी के मुताबिक यह सब एक कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने फ्रांस के साथ इन 36 लड़ाकू विमानों की जो कीमत तय की थी, मोदी सरकार उससे कहीं ज्यादा कीमत पर इन्हें खरीद रही है.

अपने बयान में रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. उसका यह भी कहना था कि ऐसे बयान की जरूरत भी नहीं थी, लेकिन इस मुद्दे पर गलतबयानी कर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है.