राजनीति में जो भी हो सब कम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों एक बयान दिया. उन्होंने एक टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान पूछा, ‘कोई व्यक्ति अगर आपके दफ़्तर के सामने दुकान लगाकर पकौड़े बेचता है तो क्या वह रोजगार नहीं है? वह व्यक्ति इस तरह रोज 200 रुपए कमाता है.’ उनके इस बयान को पहले कांग्रेस ने भुनाने की कोशिश की. पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कह दिया, ‘पकौड़ा बेचना अगर रोजगार है तो भीख मांगना भी रोजगार हुआ.’ फिर मोदी सरकार के बजट के बाद कई जगहों से विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित ‘पकौड़ा विरोध’ की ख़बरें आईं. और अब ताज़ा ख़बर है कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए लोगों तक प्रधानमंत्री की बात सही ढंग से पहुंचाने के लिए भाजपा ख़ुद ही ‘पकौड़ा पार्टियां’ आयोजित करने वाली है.

द एशियन एज़ के मुताबिक़ मनोज तिवारी की अगुवाई वाली भाजपा की दिल्ली प्रदेश इकाई ने ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम की तरह ही ‘पकौड़ा पार्टी’ के आयोजन की योजना बनाई है. शुरुआत तिवारी के लोक सभा क्षेत्र- उत्तर-पश्चिम दिल्ली से ही हो सकती है. और इसके लिए फिलहाल 12 फरवरी की तारीख़ तय की गई है. सूत्र बताते हैं कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो पार्टी देश में विभिन्न जगहों पर व्यापक स्तर पर ‘पकौड़ा पार्टियों’ का अायोजन कर सकती है.

डेक्कन क्रॉनिकल से बातचीत में ख़ुद मनोज इसकी पुष्टि करते हैं. उनके मुताबिक़, ‘कांग्रेस ने पकौड़ा बेचने वालाें की तुलना भीख मांगने वालों से की. इस तरह छोटा रोजगार करने वालों का अपमान किया है. लेकिन हम और हमारी पार्टी ऐसे सभी लोगों के साथ है.’ उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में होने वाली ‘पकौड़ा पार्टी’ में भाजपा नेताओं/कार्यकर्ताओं के साथ पकौड़े बेचने जैसे छोटे-मोटे रोजगार करने वालों को भी बुलाया जाएगा. उनसे बातचीत की जाएगी.