सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की एंबी वैली परियोजना को टुकड़ों में बेचने की इजाजत दे दी है. इससे पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस परियोजना की दो बार नीलामी की कोशिश की गई थी लेकिन, यह असफल रही. बुधवार को एंबी वैली के लिक्विडेटर और रिसीवर ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई और एके सीकरी की बेंच के समक्ष इस परियोजना को टुकड़ों में बांटकर बेचने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने यह भी कहा कि महिंद्रा लाइफस्पेस और पीरामल ग्रुप एंबी वैली का कुछ हिस्सा खरीदने के इच्छुक हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सहमति दे दी. एंबी वैली मुंबई और पुणे हाईवे पर स्थित सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर फैली हुई लग्जरी परियोजना है जिसकी कीमत 40 हजार करोड़ रु से भी ज्यादा बताई जाती है.

तीन सदस्यीय बेंच को रिसीवर की तरफ से यह जानकारी भी दी गई कि एंबी वैली में स्कूल, गोल्फ कोर्स, होटल और रेस्तरां भी मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि इन अचल संपत्तियों के अलावा वहां कार और सैकड़ों अन्य वाहनों के तौर पर चल संपत्तियां भी हैं जिनकी नीलामी से पैसा जुटाया जा सकता है. रिसीवर के मुताबिक फिलहाल इन सभी चल और अचल संपत्तियों की पहचान की जा रही है और इनकी सूची मार्च के अंत तक तैयार कर ली जाएगी.

सहारा समूह की दो कंपनियों ने रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर तीन करोड़ से भी ज्यादा निवेशकों से 17,400 करोड़ रुपये की रकम जुटाई थी. सेबी ने अगस्त 2010 में दोनों कंपनियों की जांच के आदेश दिए थे. गड़बड़ी को देखते हुए सेबी मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचा था. तब सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दोनों कंपनियों को निवेशकों को पैसा लौटाने का आदेश दिया था. पैसा लौटाने में लगातार असफल रहने पर सु्प्रीम कोर्ट ने बीते साल सहारा समूह की एंबी वैली परियोजना को नीलाम करने के आदेश दे दिए थे. सेबी के मुताबिक सहारा समूह को करीब 25 हजार 781 करोड़ रुपये की रकम निवेशकों को लौटानी है जिसमें से उसने 5110 करोड़ रुपये चुका दिए हैं.