सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद – रामजन्मभूमि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है. और इसके महज पांच दिन बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अयोध्या से रामेश्वरम तक की रथयात्रा निकालने की तैयारी में है. 13 फरवरी से 23 मार्च तक, कुल 39 दिनों की यह यात्रा कहने को तो श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी ऑफ महाराष्ट्र द्वारा आयोजित की जा रही है, लेकिन यात्रा में आरएसएस एवं उसके सहयोगी समूहों की भी पूरी भागीदारी रहने वाली है. 39 दिनों की इस यात्रा के दौरान लगभग 40 सार्वजनिक बैठकें करने की योजना है. ज़ाहिर है यह रथयात्रा इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों ध्यान में रखकर की जा रही है.

‘राम राज्य रथ यात्रा’ के नाम से आयोजित की जा रही इस यात्रा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या के कारसेवकपुरम स्थित विश्व हिंदू परिषद के मुख्यालय से रवाना करेंगे. यात्रा की शुरूआत के लिए चुनी गई यह जगह सिर्फ इसीलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यहां वीएचपी का मुख्यालय है, यह इसलिए भी महत्वूपूर्ण है क्योंकि यहीं वह कार्यशाला भी है जहां पिछले कई सालों से राममंदिर के लिए पत्थरों को तराशने का काम चल रहा है. अयोध्या में इस यात्रा की तैयारी का ज़िम्मा आरएसएस की दो सहयोगी संस्थाएं - विश्व हिंदू परिषद और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच - पर है. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अवध क्षेत्र के संयोजक अनिल कुमार सिंह बताते हैं, ‘यात्रा कि लिए इस्तेमाल होने वाला रथ बिलकुल राममंदिर के मॉडल पर बन रहा है. मुंबई में बनाया जा रहा यह रथ 10 तारीख तक अयोध्या आ जाएगा.’

वे आगे बताते हैं कि 13 तारीख को पहले कारसेवकपुरम में संत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा उसके बाद मुख्यमंत्री योगी यात्रा को रवाना करेंगे. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के अलावा यह यात्रा चार अन्य राज्यों - मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल - से होकर गुज़रेगी. इस यात्रा को निर्बाध जारी रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर सभी ज़रूरी कदम उठाने की ताकीद की है. साथ ही उन्हें आयोजकों द्वारा तैयार किया यात्रा का नक्शा भी भेजा गया है.

राममंदिर को एक बार फिर चुनावी मुद्दे की तरह इस्लेमाल किया जाएगा, यह तभी साफ हो गया था जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद गोरखधाम मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ को प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद सौंप दिया गया था. सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे राम की 100 मीटर ऊंची प्रतिमा बनवाने का ऐलान कर दिया था. इसी तरह पिछली दीपावली पर अयोध्या में सरकार की ओर से भव्य आयोजन हुए थे. इस दौरान राम और सीता के रूप में मॉडलों को सरकारी हैलीकॉप्टर से सरयू के किनारे उतारा गया था जहां मुख्यमंत्री योगी और राज्यपाल राम नाइक ने उनकी अगवानी की थी.

अनिल कुमार सिंह की मानें तो वीएचपी इस यात्रा को सफल बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाली है. विहिप के महासचिव चंपत राय ने संस्था के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे यात्रा मार्ग में होने वाली सार्वजनिक बैठकों को आयोजित करने में भरसक मदद करें.

यात्रा से पांच दिन पहले आठ फरवरी से सुप्रीम कोर्ट में राममंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सिविल अपील की सुनवाई शुरू हो गई है. यह सुनवाई पहले पांच दिसंबर से शुरू होनी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तब इसे सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पक्षकारों के वकीलों की मांग पर आठ फरवरी तक के लिए टाल दिया था.

यह मामला पिछले छह सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. उससे पहले ​30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन को तीन टुकड़ों में बांटने का आदेश दिया था. इसके तहत एक भाग सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को जबकि दो भाग रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़े को मिलने थे. लेकिन मामले के सभी 13 पक्षों ने इस फैसले को मानने से इनकार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इसके बाद नौ मई, 2011 को शीर्ष अदालत ने इनकी अपील स्वीकार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और अंतिम फैसला आने तक यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था. अब इस मामले की अंतिम सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस अशोक भूषण की विशेष पीठ कर रही है.