प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद के दोनों सदनों में दिये करीब पौने तीन घंटे के भाषण को भाजपा ब्लॉकबस्टर बता रही है और कांग्रेस फ्लॉप. नरेंद्र मोदी के लोकसभा और राज्यसभा के भाषण के बीच में राहुल गांधी का भी एक बयान था, सिर्फ पांच मिनट लंबा. इसे मीडिया में ज्यादा प्रमुखता नहीं मिली लेकिन संसद में नेताओं के बीच इसकी काफी चर्चा रही.

गुजरात में कांटे की टक्कर और राजस्थान उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद एक बदलाव कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा में भी महसूस किया जा रहा है. सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह या वित्त मंत्री अरुण जेटली, ये तीनों ही अब राहुल गांधी के हर किये को गंभीरता से लेने लगे हैं. भाजपा के एक सांसद की मानें तो पहले अनौपचारिक तरीके से ही सही राहुल गांधी की किसी भी बात पर प्रतिक्रिया ना देने का ऊपर से आदेश था. लेकिन अब राहुल की हर बात गौर से सुनने और फिर ऊपर वालों से पूछकर उस पर समझदारी से प्रतिक्रिया देने का हुक्म आया हुआ है.

भाजपा के कुछ बड़े नेता आपसी बातचीत में यह कहते सुनाई देते हैं कि राहुल गांधी के नए सलाहकार बड़े पते की बात पकड़ रहे हैं. कुछ ऐसा कांग्रेस में हो रहा है जो भाजपा के लिए धीरे-धीरे ही सही परेशानी का सबब बन सकता है. हालांकि भाजपा का कोई भी बड़ा नेता यह मानने को तैयार नहीं कि पिछले दिनों राहुल गांधी में कोई बड़ा बदलाव आया है. लेकिन सब यह कहते जरूर सुनाई देते हैं कि राहुल ने जिन लोगों की बात सुननी शुरू कर दी है वे काम के लोग हैं.

कांग्रेस को करीब से जानने वाले बताते हैं कि पहले राहुल गांधी के सलाहकार नेता ही हुआ करते थे, लेकिन अब उन्होंने विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा करना शुरू कर दिया है. इस वक्त राहुल के पास हर क्षेत्र के जानकारों की टीम है जो चोरी-छिपे नहीं, उनकी कोर टीम की तरह काम करती है. राहुल भी इनसे खुलेआम मिलते हैं और इनकी नियुक्ति बकायदा पार्टी कर रही है. नए ज़माने के हिसाब से नई-नई तरह की टीम बनाई जा रही हैं जो राहुल को नए-नए तरीके बताती हैं.

दिल्ली की सियासत पर नज़र रखने वाले एक वरिष्ठ नेता जो अब रिटायर्ड लाइफ जी रहे हैं, उनसे कुछ पत्रकारों ने पिछले दिनों बात की थी. उन्होंने बड़ी जबरदस्त एक तुलना की. उनके मुताबिक जो गलती सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी को लेकर की थी वही गलती भाजपा राहुल गांधी को लेकर करती आ रही है. सोनिया और मनमोहन को भी उनके सलाहकारों ने बता दिया था कि नरेंद्र मोदी कभी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, इसलिए उनकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है. कुछ ऐसी ही बातें राहुल गांधी के बारे में भी भाजपा नेताओं को समझाई गई थीं. उन्हें कहा गया था कि जब तक राहुल गांधी कांग्रेस की हॉट सीट पर बैठे हैं मोदी को कोई खतरा नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल की कोई बिसात नहीं है. लेकिन गुजरात चुनाव से राहुल गांधी जो करते दिख रहे हैं उससे साफ लगता है कि भाजपा ने उन्हें नाकुछ मानकर गलती की थी.

भाजपा के ही नेता कांग्रेस में बदलाव के कुछ उदाहरण पेश करते हैं - गणतंत्र दिवस की परेड पर राहुल गांधी को सरकार ने छठी लाइन में जगह दी. राहुल ने खुद इस पर कोई बवाल खड़ा नहीं किया और चुपचाप वहां जाकर बैठ गए. कांग्रेस के भी नेताओं को हिदायत दी गई कि रणदीप सुरजेवाला के अलावा इस मसले पर कोई बयानबाजी नहीं करेगा. अब राफेल डील का मसला राहुल गांधी ने उठा दिया है तो भाजपा को डर है कि अगर इससे जल्द ही पार नहीं पाया गया तो यह मोदी सरकार का ‘बोफोर्स’ भी बन सकता है.

भाजपा के एक बड़े नेता ने कुछ करीबी लोगों को बताया है कि अब यह तय हो गया है कि 2019 का चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी ही होगा और ममता बनर्जी हों या अरविंद केजरीवाल आखिरकार राहुल के साथ ही जाएंगे. इसलिए अब तैयारी 2019 की ही है. लोकसभा और फिर राज्यसभा में मोदी का भाषण इसी तैयारी का पहला अध्याय था. इसमें उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक पर हमला किया और पूरे गांधी परिवार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया. नरेंद्र मोदी के इतने जबरदस्त हमले के बाद भी राहुल अपनी सधी हुई लाइन से नहीं हिले. वे यही पूछते रहे कि राफेल जहाज कितने रुपए में खरीदा गया? इस एक छोटे से सवाल का जवाब प्रधानमंत्री पौने तीन घंटे के भाषण में भी जवाब नहीं दे पाए. कांग्रेस को अब राहुल में उम्मीद दिख रही है और भाजपा को उनसे अब थोड़ा डर लगने लगा है.