मालदीव में जारी राजनीतिक संकट पर चीन की तरफ से एक अहम बयान आया है. शुक्रवार को उसने कहा ​कि मालदीव संकट का समाधान निकालने की दिशा में चर्चा करने के लिए वह भारत के साथ संपर्क में है. उसका यह भी कहना था कि वह इस मुद्दे को भारत के साथ एक और टकराव की वजह नहीं बनने देना चाहता.

पिछले दिनों डोकलाम और संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच टकराव देखने को मिला था. चीन के इस बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है. हालांकि शुक्रवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मालदीव की संप्रभुता का ख्याल रखना चाहिए.

गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र संघ ने मालदीव में बढ़ रहे संकट के समाधान के लिए मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन चीन ने उस प्रस्ताव का विरोध किया था. चीन ने तब भी यही कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मालदीव की संप्रभुता और अखंडता का ध्यान रखना चाहिए.

मालदीव में जारी राजनीतिक संकट की शुरुआत पिछले हफ्ते गुरुवार से हुई थी. वहां के सुप्रीम कोर्ट ने देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद को आरोपों से बरी कर दिया था. कोर्ट ने जेल में बंद नौ दूसरे नेताओं को भी रिहा करने के आदेश दिए थे. लेकिन मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने अदालत के आदेश को नहीं माना और फिर देश में 15 दिनों के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी. इसके बाद मालदीव सरकार ने कुछ अहम लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इनमें अब्दुल्ला यमीन के ही सौतेले भाई और पूर्व राष्ट्रपति मैमून अब्दुल गयूम के अलावा वहां के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं. अमेरिका समेत दुनिया के विभिन्न लोकतांत्रिक देशों के अलावा राष्ट्र संघ ने भी यमीन से कोर्ट के आदेश का पालन करने के साथ आपातकाल को खत्म करने की अपील की है.