राफेल विमान सौदे को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म बना हुआ है और सोशल मीडिया में भी इस पर खूब बहस चल रही है. इस मामले में कांग्रेस मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है. उसका कहना है कि यूपीए सरकार ने इन विमानों की जो कीमत तय की थी, उससे कहीं ज्यादा कीमत पर मोदी सरकार ने इन्हें खरीदा है. इसके साथ ही कांग्रेस सरकार से इस सौदे की कीमत का खुलासा करने की मांग भी करती रही है. कल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में बयान दिया था कि कांग्रेस राफेल सौदे की जानकारी पूछकर देश की सुरक्षा से समझौता कर रही है. ट्विटर हैंडल‏ @abad_chauhan पर तंजभरे लहजे में जेटली से पूछा गया है, ‘...यह देश की सुरक्षा का मसला है या कुर्सी की सुरक्षा का?’

कई यूजर्स ने यहां राफेल विमान सौदे की तुलना बोफोर्स घोटाले से भी की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भाजपा को निशाने पर लिया है. ट्विटर हैंडल ‏ @AreeDada__ पर एक मजेदार प्रतिक्रिया है, ‘वो थोड़े बोफोर्स क्या हुए, तुम तो पूरे राफेल हो गए – भूखी नंगी जनता.’

वहीं आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अरुण जेटली के बयान पर सवाल उठाया है और एक ट्वीट करके कहा है कि डील में कुछ काला है. इसको शेयर करते हुए भी कई लोगों ने मोदी सरकार को घेरा है. इनविंसीबल का ट्वीट है, ‘यह खुद नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हर भारतीय नागरिक को केंद्र सरकार द्वारा किए गए खर्च का ब्यौरा जानने का अधिकार है और अगर सरकार ब्यौरा छिपाने की कोशिश करती है तो इसका मतलब है कि कहीं कुछ गड़बड़ हो रही है.’

सोशल मीडिया में इस मामले पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

मिथिलेश प्रियदर्शी | facebook/mithilesh.priyadarshy

मैं खट्टा-मीठा लेमनचूस/तू डेयरी मिल्क की सिल्क प्रिये
मैं दीपावली का रॉकेट/तू मोदी की राफेल प्रिये
मुश्किल है अपना मेल प्रिये... मुश्किल है अपना मेल प्रिये.

सतीश आचार्य | @satishacharya

‘2022 की न्यू इंडिया ट्रेन वाया 1947’

दुर्गेश सिंह | facebook/vishesh03

बोफोर्स घोटाला था, ऐसा कहने वाले आज कह रहे हैं कि राफेल डील की जानकारी देना देशहित में नहीं है... अरे, हां भई, मोदी जी जो भी करें, उस पर सवाल उठाना देश विरोधी ही है.

रमेश शाहा | @RAMESHSHAHA

अगर बोफोर्स पर सवाल उठाए जा सकते हैं तो राफेल पर क्यों नहीं? क्या राफेल को सुरखाब के पंख लगे हैं?

उमाशंकर सिंह | @umashankarsingh

आप बोफ़ोर्स केस खोल रहे हैं पर इस तोप की असल क़ीमत बताए बिना ये कैसे साबित होगा कि इस डील में घोटाला हुआ? इसी तरह राफ़ेल की असल क़ीमत बताए बिना आप कैसे कह सकते हैं कि इसमें कोई घोटाला नहीं हुआ? या फिर आप ब्लैकमेल कर रहे हैं कि राफ़ेल की क़ीमत पूछोगे तो बोफ़ोर्स पर तुमको कस देंगे!

सुयश सुप्रभ | facebook/suyash.suprabh

मोदी जी सुनिए - ‘राफेल’ में ‘फेल’ है. फेल माने एफ...ए...आई...एल... यहां एफ माने फंदा!