भारत चाहता है कि मालदीव में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) एक जांच दल भेजकर वहां के हालात का जायजा ले. द टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. इसके मुताबिक भारत का मानना है कि निष्पक्ष रूप से जुटाई जानकारियों के आधार पर अब्दुला यमीन की सरकार से एक बार फिर मालदीव में लोकतंत्र बहाल करने के लिए कहा जाना चाहिए. नौ राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने मालदीव में आपातकाल लगा दिया है.

भारत की यह कोशिश मालदीव संकट को कूटनीति के जरिये हल करने के प्रयास के तौर पर भी देखी जा रही है. वैसे मालदीव के मुद्दे पर शुक्रवार की सुबह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत भी हुई थी. इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने वहां पैदा हुए राजनीतिक संकट पर चिंता जाहिर करते हुए मालदीव में लोकतंत्र की बहाली पर बल दिया था.

मालदीव में लोकतंत्र की बहाली और आपातकाल को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पहले ही अब्दुल्ला यमीन से अपील कर चुकी है. राजनीतिक संकट के समाधान के लिए वहां यूरोपीय संघ के अलावा जर्मनी और ब्रिटेन ने बृहस्पतिवार को अपने दूत भी भेजे थे लेकिन मालदीव सरकार ने उनसे मुलाकात नहीं की थी. सूत्रों के मुताबिक दुनिया के कई देश चाहते हैं कि मालदीव में जारी संकट के समाधान के लिए भारत अगुवा बने.

बता दें कि मालदीव में राजनीतिक संकट की शुरुआत बीते हफ्ते गुरुवार से हुई थी. वहां के सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी दलों के नेताओं को जेल से आजाद करने का आदेश दिया था. लेकिन अब्दुल्ला यमीन ने इसका पालन नहीं किया और फिर देश में 15 दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया. इसके बाद वहां के पूर्व राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.