मालदीव के निर्वासित राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से एक बार फिर मदद का हाथ आगे बढ़ाने का आग्रह किया है. उन्होंने इसके लिए अब दो अलग वजहें गिनाई हैं. द टाइम्स आॅफ इंडिया से बातचीत में नशीद ने कहा है कि मालदीव में इस्लामिक कट्टरवाद और चीन का हतस्तक्षेप व्यापक स्तर पर बढ़ गया है और ऐसे में द्वीप को इन दोनों से मुक्ति दिलाने के लिए भारत को अपनी तरफ से दखल देना चाहिए.

मोहम्मद नशीद के अनुसार चीन ने मालदीव में 40 मिलियन डॉलर के निवेश की बात की है. लेकिन उनके मुताबिक निवेश की आड़ में चीन वहां के करीब 17 द्वीपों पर कब्जा जमा चुका है. इसके अलावा नशीद ने आतंकवाद के मोर्चे पर भारत की चिंता बढ़ाने वाली भी एक बात कही है. उन्होंने कहा है कि इस्लामिक कट्टरता बढ़ने से मालदीव के कई लोग जिहादी बनने के लिए सीरिया और ईराक देशों की ओर रुख कर गए थे. लेकिन जैसे-जैसे आईएस का खात्मा हुआ ये लोग लौट आए. उनके मुताबिक मालदीव लौटने के बाद ऐसे लोग स्थानीय पुलिस और रक्षा सेवाओं में भर्ती हो गए हैं जो देश के लिए खतरनाक हो सकता है.

मालदीव में राजनीतिक संकट खड़ा होने के बाद मोहम्मद नशीद लगातार भारत से मदद की अपील कर रहे हैं. पिछले दिनों जब चीन ने भारत को मालदीव में हस्तक्षेप न करने के लिए कहा तो उस वक्त भी नशीद ने चीन के उस बयान की निंदा की थी. साथ ही उन्होंने भारत को समस्या से उबारने वाला देश भी बताया था.

मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी ने नेता मोहम्मद नशीद मालदीव में लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए पहले राष्ट्रपति हैं. वे हालांकि फिलहाल मालदीव से निर्वासन झेलते हुए श्रीलंका में रह रहे हैं. नशीद की मांग है कि देश में आपातकाल खत्म हो और लोकतंत्र फिर से बहाल किया जाए.

बता दें कि मालदीव में राजनीतिक संकट की शुरुआत पिछले सप्ताह गुरुवार से हुई थी. तब विपक्ष के नौ नेताओं को रिहा करने के साथ वहां के सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद नशीद को भी आरोपों से मुक्त कर दिया था. कोर्ट के उस आदेश को हालांकि वहां के मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने नहीं माना था. यमीन के विरोध में जनता सड़कों पर उतर आई थी. इसके बाद राष्ट्रपति ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी. संयुक्त राष्ट्र संघ और भारत, अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने यमीन से वहां आपातकाल खत्म करने और लोकतंत्र को बहाल करने की अपील की है.