शत्रुघ्न जी, आपने कहा है कि आपको पार्टी में घुटन महसूस हो रही है. तो फिर आप पार्टी छोड़ क्यों नहीं देते?

मार ही डाले ये दुनिया बेमौत, लेकिन हम जिंदा हैं, जीने का हुनर रखते हैं!...घुटन से बचने के लिए क्या इंसान जीना छोड़ देता है! जितनी घुटन में जी रहा हूं, उससे ज्यादा घुटन दूसरों के लिए न पैदा कर दी तो मैं भी भाजपा का सच्चा शत्रु नहीं! ...मेरे कहने मतलब है कि घुटन होने पर सांस लेने के नए तरीके खोजे जाते हैं, हमने भी खोज लिया है.

कौन-सा तरीका?

यशवंत सिन्हा का ‘राष्ट्र मंच’ सांस लेने का ही एक तरीका है न. इससे हमें तो सांस आने लगी, लेकिन औरों की घुटने लगी! (मुस्कुराते हुए)

आप जब-तब पार्टी के विरूद्ध क्यों बोलते रहते हैं?

खामोश!...अब्ब्ब...मेरा मतलब कि मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि ‘शत्रु’ को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए और न ही मजबूर!

आपके द्वारा पार्टी की लगातार आलोचना करने से खिन्न होकर केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने कहा है कि आपको पार्टी को तलाक दे देना चाहिए. इस बारे में आप क्या कहना है?

तीन तलाक देने में मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पहले पार्टी से अपना मेहर तो वसूल लूं! मेरी बात आप यूं समझिए कि ऐब तो हर किसी में होते हैं, पर मैं ऐसा नामाकूल शौहर नहीं जो सिर्फ सब्जी में नमक कम होने जैसी मामूली बातों पर तलाक देता फिरे!

लेकिन क्या ऐसा नहीं है कि पार्टी से आपकी नाराजगी बढ़ती ही जा रही है?

मेरी नाराजगी पार्टी से नहीं सिर्फ पार्टी के ‘वन मैन शो’ और ‘टू मैन आर्मी’ से है!

आपको ऐसा क्यों लग रहा है कि पार्टी आपके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है?

क्योंकि सौतेला बच्चा ही माता-पिता की उपेक्षा का सबसे ज्यादा शिकार होता है.

आखिर आप खुद को उपेक्षित क्यों महसूस कर रहे हैं?

जैसे परिवार में सबसे ज्यादा उपेक्षा सौतेले बच्चे के हुनर की होती है, वैसे ही मेरे हुनर की भी पार्टी में उपेक्षा हो रही है. इतनी अच्छी डायलॉग डिलिवरी के बावजूद मुझे आज तक लीड रोल नहीं मिला! जबकि बहुत सामान्य-सा संवाद बोलने वाले कई लोगों को बहुत अहम रोल दिये गए हैं. ऐसे में मैं उपेक्षित कैसे न महसूस करूं?

अच्छा यह बताइये कि भाजपा से आपको सबसे बड़ी शिकायत क्या है?

पार्टी ने मुझे सिर्फ डायलॉग डिलिवरी में उलझाकर मेरी अभिनय क्षमता को पूरी तरह से नकार दिया है. निसंदेह बयानबाजी की भी अपनी अलग अहमियत है, आखिर इतने बेबाक बयान देने की आजादी पूरी पार्टी में चंद ही लोगों को है. पार्टी में रहकर पार्टी के समर्थन या खिलाफ बोलने की आजादी की कीमत इस देश में सिर्फ एक ही व्यक्ति समझ सकता है, और वे हैं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन जी. लेकिन मुझे तकलीफ इस बात की है कि पॉलीवुड में एक सच्चे अभिनेता को उसके मन लायक रोल नहीं दिया गया.

यह पॉलीवुड क्या है?

मैंने पॉलिटिक्स और बॉलीवुड को मिलाकर पॉलीवुड बना दिया है. पॉलिटिक्स में अभिनय की हाई रेंज को देखकर मैंने इसे पॉलीवुड का नाम दिया है. यहां नेताओं के अभिनय के सामने के बॉलीवुड के अभिनेता भी पानी भरते हैं.

कैसे?

देखिये, बॉलीवुड के नायक-नायिकाओं के अभिनय को देखकर जनता हमेशा यही कहती है, कितना शानदार अभिनय किया है. लेकिन राजनीति में कौन अभिनय कर रहा और कौन नहीं, जनता आज तक नहीं जान सकी! जहां अभिनय इतना जीवंत है कि देखने वाला हकीकत ही समझे, तो उससे श्रेष्ठ अभिनय भला क्या होगा!

राजस्थान के तीन उपचुनावों में भाजपा की हार पर आपका कहना था कि यह पहला राज्य है जिसने भाजपा को तीन तलाक दिया है. आखिर आप अपनी पार्टी के लिए ऐसे तंजभरी बातें क्यों बोलते रहते हैं?

खामोश! (डांटते हुए) सौतेले बच्चे से अभिभावक के लिए आखिर और क्या बोलने की उम्मीद करती हैं आप! वैसे मेरी बात का मतलब यह था कि किसी भी पार्टी को समय रहते अपना मूल्यांकन कर लेना चाहिए.

भाजपा की तेलंगाना इकाई के प्रवक्ता कृष्णा सागर राव ने यशवंत सिन्हा और आप पर पार्टी को धोखा देने का आरोप लगाया है. इस बारे में क्या कहेंगे?

धोखा हम क्या देंगे, धोखा तो वे दे रहे हैं पूरे देश को. वादा किया था कि हर एक के खाते में 15 लाख रुपये डालेंगे. पर सिर्फ अकाउंट खोल के छोड़ दिये!...बल्कि लोगों की गुल्लकें तक खाली करवा दीं.

उनका यह भी आरोप है कि आप दोनों बिहार और गुजरात चुनावों में पार्टी को हराना चाहते थे. इस बात में कितनी सच्चाई है?

मैं ऐसे तोगड़ियाई किस्म के काम नहीं करता,...मैं सामने से वार करने वाला शत्रु हूं!

नोटबंदी और जीएसटी पर आपकी क्या राय है?

देखिये, ज्यादा घिसने से कोई चीज चंदन नहीं हो जाती!...इन मुद्दों को और कब तक घिसने का इरादा है आप लोगों का. किसी नए मुद्दे पर बात कीजिए.

अच्छा यह बताइये कि पद्मावती विवाद पर आप क्या कहेंगे? क्या इतनी हिंसा के बाद सरकार को कोई स्ट्रॉन्ग एक्शन नहीं लेना चाहिए था?

स्ट्रॉन्ग एक्शन करणी सेना ले तो रही है, आखिर एक ही चीज पर कितने लोग एक्शन लेंगे! ओह...मेरा मतलब है कि यह एक बहुत ही गैरजरूरी मुद्दा है...हमारे देश में इससे कहीं ज्यादा जरूरी मुद्दे हैं एक्शन लेने के लिए.

करणी सेना के महिपाल सिंह ने दीपिका पादुकोण की नाक काटने की बात की थी. इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

इस पर तो दीपिका के पिता को प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी. मेरी बेटी को कोई ऐसा कहता तो मैं उसे हमेशा के लिए खामोश कर देता!

क्या मतलब?

अरे, मतलब कि मैं उसकी जबान खींच लेता!

अच्छा यह बताइये कि पॉलीवुड और बॉलीवुड में सबसे बड़ा क्या फर्क है?

देखिये, पॉलीवुड में अक्सर राजनीति की आड़ में अभिनय होता है जबकि बॉलीवुड में कभी-कभी अभिनय की आड़ में राजनीति हो जाती है. पॉलीवुड में स्मृति ईरानी जैसे कई मंझे हुए अभिनेता और अभिनेत्रियां हैं जिनके बारे में यह पता लगाना असम्भव ही है कि वे कब अभिनय कर रहे हैं और कब राजनीति!

एक अंतिम सवाल. आपके फिल्मी और राजनीतिक जीवन में क्या समानता है?

मेरे फिल्मी और राजनीतिक, दोनों करियर के डायलॉग हिट हैं! (ठहाका लगाते हुए)