सुप्रीम कोर्ट ने दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को राजनीतिक दलों में जिम्मेदार पद दिए जाने पर सवाल उठाया है. द हिंदू के अनुसार चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता के लिए बड़ा झटका बताया है. सोमवार को उन्होंने कहा, ‘कोई दोषी व्यक्ति किसी दल में पदाधिकारी कैसे हो सकता है और कैसे चुनाव लड़ने के लिए लोगों का चयन कर सकता है? यह हमारे (पहले के) फैसले के भी खिलाफ है कि राजनीतिक दलों में भ्रष्टाचार को इजाजत देना चुनावी शुद्धता बनाए रखने में बाधा है.’

सोमवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को संबोधित अपनी मौखिक टिप्पणी में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, ‘एक व्यक्ति जो सीधे चुनाव नहीं लड़ सकता है, लोगों को जुटाकर एक राजनीतिक दल बना लेता है और चुनाव लड़ जाता है.’ उन्होंने आगे कहा कि लोग अस्पताल और स्कूल चलाने जैसी परोपकारी कार्यों के लिए तो संगठन बना सकते हैं, लेकिन जब शासन का मामला आता है तब बात अलग हो जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को इस मामले में दो हफ्ते में अपनी राय स्पष्ट करने और हलफनामा जमा करने का निर्देश दिया है.

इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि कानून किसी दोषी व्यक्ति को किसी राजनीतिक दल में पदाधिकारी बनने या राजनीतिक दल बनाने से नहीं रोकता है. शीर्ष अदालत इस समय अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की एक याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें दोषी व्यक्तियों के राजनीतिक दलों में पदाधिकारी बनने पर रोकने की मांग की गई है.