केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा सोमवार को जारी हुए आंकड़े मोदी सरकार के लिए राहत लेकर आए हैं. इसके अनुसार जनवरी 2018 में खुदरा महंगाई दर घटकर 5.07 फीसदी रह गई है. एक महीने पहले यह 5.21 फीसदी थी. दूसरी ओर उद्योगों की विकास दर मापने वाले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में दिसंबर 2017 में 7.1 फीसदी की तेज बढ़त दर्ज की गई है.

हर महीने की 12 तारीख को खुदरा महंगाई और आईआईपी, दोनों आंकड़े जारी करने वाले सीएसओ ने यह भी बताया है कि मौजूदा ​वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों (अप्रैल से दिसंबर) में उद्योगों की विकास दर 3.7 फीसदी रही है. इससे पहले नवंबर 2017 में भी इसमें 8.4 फीसदी की तेजी आई थी. औद्योगिक उत्पादन में तेजी के लगातार बने रहने को अर्थव्यवस्था के लिए काफी बढ़िया माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि इससे फरवरी के आखिर में जारी होने वाले तीसरी तिमाही के विकास दर के आंकड़ों के बेहतर होने की संभावना बढ़ गई है.

उधर, महंगाई के मामले में सीएसओ के आंकड़ों से साफ पता चलता है कि जनवरी में खुदरा महंगाई में कमी आने का मुख्य कारण खाने-पीने के सामानों जैसे सब्जियों, अंडे, दाल, चीनी और मिठाई का सस्ता होना रहा है. इसके चलते जनवरी में खाद्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीएफपीआई में दिसंबर के 4.96 फीसदी के बजाय केवल 4.70 फीसदी की वृद्धि हुई है. खुदरा मूल्य सूचकांक में खाने-पीने के सामानों की हिस्सेदारी करीब 46 फीसदी की होती है.

वैसे विशेषज्ञों का मानना है कि घटने के बावजूद खुदरा महंगाई अभी भी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों के लिए चिंता की वजह बनी हुई है. मौजूदा वित्त वर्ष के बाकी दो महीनों में भी इसके पांच फीसदी से ज्यादा बने रहने का अनुमान है. जानकारों का यह भी कहना है कि ग​र्मी के मौसम में यह दर छह फीसदी से ज्यादा भी हो सकती है. हालांकि आरबीआई ने इसे चार फीसदी से कम रखने का लक्ष्य रखा है जिसके फिलहाल पूरे होने के आसार नहीं हैं.