चुनाव आयोग ने राज्य सभा की 58 सीटों के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात जैसे कई राज्यों की ये सीटें अगले महीने खाली हो रही हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक इनके लिए वोटिंग 23 मार्च को होगी. वोटों की गिनती भी उसी दिन हो जाएगी.

दो अप्रैल, 2018 को राज्यसभा के जिन सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें चार सांसद गुजरात के भी हैं. इनमें तीन 2012 में चुने गए थे और एक 2016 के उपचुनाव में. ये चारों राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं. इनमें से तीन अरुण जेटली, पुरुषोत्तम रुपाला और मनसुख मांडविया केंद्रीय मंत्री हैं जबकि चौथे राज्यसभा सांसद हैं शंकरभाई वेगड.

हालिया विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के विधायकों की संख्या घटकर 99 रह गई है. उसे एक निर्दलीय विधायक का समर्थन भी हासिल है. ऐसे में यह संभव नहीं लग रहा कि भाजपा राज्यसभा की चारों सीटें बरकरार रख सके. माना जा रहा है कि इनमें से दो सीटें भाजपा को मिलेंगी और दो कांग्रेस को. भाजपा में चर्चा है कि अरुण जेटली को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा जाएगा और गुजरात की दो सीटें वहां के दोनों केंद्रीय मंत्रियों को दी जाएंगी.

कांग्रेस के भीतर इन राज्यसभा चुनावों के लिए उठापटक शुरू हो गई है. हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का राज्य के पटेल समुदाय के लोगों ने काफी साथ दिया. हार्दिक पटेल ने भी कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार किया और उनके सहयोगियों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा.

ऐसे में अब कांग्रेस समर्थक पटेल समुदाय से यह मांग उठ रही है कि इन दो सीटों में से कम से कम एक सीट किसी पटेल नेता को मिले. चुनावों में कांग्रेस का साथ देने वाले पाटीदारों के एक समूह ने इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बाकायदा पत्र लिखकर यह मांग की है. इस पत्र में यह लिखा गया है कि पिछले 36 सालों में गुजरात से कांग्रेस ने किसी पटेल नेता को राज्यसभा नहीं भेजा. 1982 में कांग्रेस ने आखिरी बार किसी पटेल नेता को राज्यसभा सांसद बनाया था.

इस पत्र में यह जिक्र भी किया गया है कि 1990 के दशक में प्रदेश की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने अब तक पटेल समुदाय के सात नेताओं को राज्यसभा भेजा. यह भी कि केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने इस समाज के लोगों को मंत्री भी बनाया. इसमें नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों पुरुषोत्तम रुपाला और मनसुख मांडविया का उदाहरण दिया गया है. पत्र में कहा गया है कि पटेल समाज को तवज्जो देने का राजनीतिक फायदा गुजरात में भाजपा को लगातार मिला है.

इस पत्र के जरिए राहुल गांधी को कहा गया है कि विधानसभा चुनावों में पटेलों के साथ की वजह से कांग्रेस पिछले कई चुनावों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन कर पाई और अगर पार्टी चाहती है कि इस समुदाय के लोग वापस भाजपा के पाले में नहीं जाएं तो दो राज्यसभा की सीटों में से कम से कम एक सीट पाटीदार समाज के किसी नेता को मिलनी चाहिए. पत्र के मुताबिक अगर ऐसा होता है तो पटेल समाज में यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उनके योगदान का सम्मान किया और इससे आगे भी इस समाज को कांग्रेस के साथ बनाए रखने में मदद मिलेगी.

गुजरात कांग्रेस के नेताओं से बात करने पर यह भी पता चलता है कि हार्दिक पटेल की ओर से भी कांग्रेस पर इस बात का दबाव है कि दो में से कम से कम एक सीट पटेल समाज के किसी नेता को दी जाए. राज्यसभा के लिए कांग्रेस की ओर से जो नाम चल रहे हैं उनमें एक नाम प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मनहर पटेल का है.

वहीं अहमदाबाद में गुजरात की राजनीति की खबर रखने वाले कुछ पत्रकारों से बातचीत करने पर पता चलता है कि कांग्रेस पर भले ही पटेल समाज को एक सीट देने का दबाव हो, लेकिन पार्टी में अभी तक कुछ और ही बातचीत चल रही है. कांग्रेस में चल रही चर्चाओं के मुताबिक राज्यसभा की एक सीट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी को मिलनी तय है. दूसरी सीट के लिए जनार्दन द्विवेदी का नाम चल रहा है. जनार्दन द्विवेदी हाल तक दिल्ली से राज्यसभा सांसद थे लेकिन यहां की तीनों सीटें आम आदमी पार्टी के पाले में जाने के बाद अब वे राज्यसभा में नहीं हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व राज्यसभा में जनार्दन द्विवेदी की मौजूदगी चाहता है. हालांकि उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा भेजने का भी विकल्प है. ऐसी स्थिति में गुजरात में दूसरी सीट पटेल समाज के किसी नेता को दी जा सकती है.

कुल मिलाकर विधानसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद गुजरात में राज्यसभा चुनाव कांग्रेस के लिए संतुलन साधने के हिसाब से मुश्किल हो गए हैं. गुजरात से उसके दो राज्यसभा सांसद तो बढ़ेंगे, लेकिन अगर पटेल समाज के किसी नेता को पार्टी ने राज्यसभा सांसद नहीं बनाया तो इस समाज के लोगों के नाराज होने की आशंकाओं का सामना भी कांग्रेस को करना पड़ेगा.