अपने एक विवादित बयान के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत एक बार फिर चर्चा में हैं. रविवार को बिहार के मुजफ्फरपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि सेना को तैयार होने में छह-सात महीने का समय लग जाएगा, लेकिन संघ के कार्यकर्ता तीन दिन में ही तैयार हो सकते हैं. विरोधियों ने इस बयान के आधार पर आरोप लगाया है कि भागवत ने संघ कार्यकर्ताओं की तुलना सेना से करके उसका अपमान किया है और उन्हें इस पर माफी मांगनी चाहिए. सोशल मीडिया पर भी कई लोगों इससे मिलती-जुलती प्रतिक्रियाएं दी हैं और आज ट्विटर पर ApologiseRSS ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल रहा. इस बयान पर आशुतोष उज्ज्वल की चुटकी है, ‘आरएसएस के सैनिक तीन दिन में तैयार हो जाएंगे... कोई उन्हें बताए कि आरम दक्ष करके दुश्मन नहीं मारे जा सकते.’ इस बहाने यहां भाजपा को भी निशाने पर लिया गया है. नितिन ठाकुर की फेसबुक पोस्ट है, ‘मोहन भागवत के सेना वाले बेतुके बयान ने साबित कर दिया कि संघ ही भाजपा का मातृ संगठन है.’

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट करके सवाल उठाया है, ‘संघ प्रमुख ऐसा कुछ कहते लग रहे हैं कि संघ कार्यकर्ता हमारी सीमाओं की रक्षा करने में सेना से बेहतर काम कर सकते हैं. इसे कतई ‘राष्ट्रवादी’ बात नहीं कहा जा सकता, क्या कहा जा सकता है?’ ट्विटर हैंडल @hpervej213 पर टिप्पणी है, ‘मोहन भागवत के इस बयान में कई सवाल छुपे हुए हैं? क्या संघ प्रमुख भारतीय सेना की क्षमता पर भरोसा नहीं करते? क्या उन्हें लगता है कि सीमा पर कभी ऐसी स्थिति आएगी कि भारतीय सेना को संघ परिवार के सैनिकों की ज़रूरत पड़ेगी?’

हालांकि सोमवार को इस बयान के हवाले से संघ का स्पष्टीकरण भी आया. इसमें कहा गया है कि भागवत के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और उन्होंने सेना के जवानों की संघ कार्यकर्ताओं से तुलना नहीं की थी. सोशल मीडिया पर इसे शेयर करते हुए लोगों ने इस पर भी सवाल उठाए हैं.

इस पूरे विवाद पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

प्रेमचंद गुड्डू | facebook/ShriPremchandGuddu

जब संघ के लोग सुरक्षाबलों से भी ज्यादा सक्षम हैं तो भागवत जी को जेड प्लस सुरक्षा की क्या जरूरत है?

भारतेंदु भूषण | facebook/chauhansunny25

अगर संघ प्रमुख को लगता है कि संघ सेना के मुकाबले हमारी सीमाओं की रक्षा बेहतर तरीके से कर सकता है तो फिर उसका नागपुर स्थित मुख्यालय भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थानांतरित कर देना चाहिए...

हिस्टरी ऑफ इंडिया |‏ @RealHistoryPic

भारतीय सेना को मदद देने वाले ‘योद्धा’ तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ द्वारा लगाया गया तीन दिवसीय शिविर (2018)

ओम थानवी | @omthanvi

खबर है कि हरियाणा रैली में अमित शाह की रैली के लिए 150 कम्पनियां (सुरक्षा बलों) चाहिए. संघ की ‘सेना’ भेजो न?

सुयश सुप्रभ | facebook/suyash.suprabh

मोहन भागवत, मनोज तिवारी... सब बॉर्डर पर जाने की बात कर रहे हैं. मतलब देश बिल्कुल नहीं संभल रहा. इतने नादान तो हम भी नहीं हैं.

प्रोफेसर राकेश सिन्हा | @RakeshSinha01

संघ के स्वयंसेवक अनुशासन और देशप्रेम के कारण कभी-भी काम आने के लिए तैयार रहते हैं. जबकि सेना की नई टुकड़ी तैयार करने के लिए प्रक्रिया के तहत भरती और ट्रेनिंग देने में समय लगता है. मोहन भागवत जी ने यही कहा है. इसमें क्या गलत है? सेना और संघ एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं.