रूस ने भारत से 20 मिलियन डॉलर यानी लागभग 125 करोड़ रुपए मांगे हैं. रक्षा सूत्रों के हवाले से यह ख़बर आई है. उनके मुताबिक़ भारत की परमाणु पनडुब्बी आईएनएस चक्र की मरम्मत के लिए रूस ने यह रकम मांगी है.

द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ बीते साल हुई एक दुर्घटना में आईएनएस चक्र के सामने वाले हिस्से में काफ़ी नुक़सान हुआ था. इसके बाद से मरम्मत के इंतज़ार में यह समुद्र तट पर खड़ी हुई है. घटना पिछले साल अक्टूबर में सामने आई थी. यह दुर्घटना भी ऐसे समय में हुई जब स्वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत पहले ही मरम्मत की प्रक्रिया से गुजर रही है. इंसानी ग़लती से आईएनएस अरिहंत भी 2016 में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. इसके बाद से अब तक यह सामान्य कामकाज के लायक नहीं हो सकी है.

सूत्र बताते हैं कि विशाखापट्‌टनम समुद्र तट पर खड़ी आईएनएस चक्र के लिए सोनार डोम (सामने चोंचनुमा हिस्सा) का पांच गुणा पांच का एक पैनल रूस से आएगा. फिर इसे यहीं फिट किया जाएगा. इसके अलावा मरम्मत के लिए जो कलपुर्जे लगेंगे वे भी रूस से ही आएंगे. क्योंकि रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस पनडुब्बी में जिन कलपुर्जों को बदलने की ज़रूरत है उन्हें वह अपने यहां ही तैयार करेगा.रूस के राजदूत निकाेलाई कुदशेव ने इसकी पुष्टि की है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि मरम्मत का काम कब तक पूरा होगा.

ग़ौरतलब है कि आईएनएस चक्र मूल रूप से रूसी परमाणु पनडुब्बी है. भारत ने 2011 में इसे रूस से लीज़ (पट्‌टे) पर लिया था. रूस में इसे के-152 नेरपा के नाम से जाना जाता है. भारतीय नौसेना में इसे चार अप्रैल-2012 को शामिल किया गया था. नौसेना की पूर्वी कमान इसकी सेवाएं ले रही है.