प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओमान यात्रा के दौरान भारत को एक बड़ी रणनीतिक सफलता मिली है. हिंद महासागर में चीन से मुकाबले के मद्देनज़र इसे काफ़ी अहम माना जा रहा है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान ओमान ने अपने दुक़्म बंदरग़ाह के रणनीतिक उपयोग की भारत को इजाज़त दे दी है. यानी अब भारत यहां अपना नौसैनिक अड्‌डा बना सकता है. साथ ही व्यापारिक गतिविधियां भी यहां से संचालित कर सकता है. यही नहीं भारत इस जगह से पाकिस्तान के ग्वादर और ईरान के चाबहार बंदरग़ाह पर भी आसानी से नज़र रख सकता है.

ग़ौरतलब है कि ईरान का चाबहार बंदरग़ाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसे विकसित करने का ठेका ईरान ने भारत को दिया है. इसके ज़रिए पाकिस्तान की सीमा को छुए बिना भारत ने अफ़ग़ानिस्तान और उससे आगे तक अपनी पहुंच बना ली है. दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के ग्वादर बंदरग़ाह का विकास चीन कर रहा है. वह चीन-पाकिस्तान के बीच आर्थिक गलियारे के लिहाज़ से काफ़ी अहम है.

बहरहाल दुक़्म बंदरग़ाह के बाबत भारत और ओमान के बीच जो समझौता हुआ है उसके तहत भारत अब यहां अपने सैन्य जहाजों, पनडुब्बियों आदि की मरम्मत भी कर सकता है. सूत्रों के मुताबिक़ इस संबंध में दोनों देशों के बीच सहमति पत्र पर दस्तख़त किए जा चुके हैं. हालांकि यहां भारतीय सैन्य गतिविधियां बीते कुछ समय से पहले ही बढ़ी हुई हैं. बीते सितंबर में भारत ने यहां एक हमलावर पनडुब्बी तैनात की थी. इसके साथ ही नौसैनिक जहाज आईएनएस मुंबई और लंबी दूरी के दो पी-81 गश्ती विमान भी तैनात किए थे.