बीते दो वर्षों के दौरान भारत के वनों के क्षेत्रफल में एक फीसदी का इजाफा हुआ है. पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में जहां देश का वन क्षेत्र 701495 वर्ग किलोमीटर का था तो वहीं 2017 में बढ़कर वह 708273 वर्ग किलोमीटर पर पहुंच गया. यह इजाफा करीब 6778 वर्ग किलोमीटर का है. वनों के लिहाज से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओड़ीशा और तेलंगाना में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई.

लेकिन इस खबर में एक चिंताजनक तथ्य भी घुला है. रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत के छह राज्यों के वनों का क्षेत्रफल घटा है. यही नहीं पूर्वी हिमालय के 630 वर्ग किलोमीटर हिस्से में फैला वन क्षेत्र भी सिकुड़ा है.

वनों की वृद्धि बयान करने वाली इंडिया स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) सोमवार को पर्यावरण मंत्रालय ने जारी की. उसके मुताबिक बीते दो वर्षों के दौरान भारत के वन क्षेत्र में एक फीसदी की वृद्धि हुई है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि बीते दो सालों में वन क्षेत्र के साथ देश के वृक्ष क्षेत्र में भी इजाफा हुआ है. इसके अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के 24.3 प्रतिशत हिस्से पर वन या फिर वृक्ष मौजूद हैं.

सरकार ने इस खबर पर खुशी जताई है. पर्यावरण मंत्री हषवर्धन ने कहा, ‘2015 की तुलना में 2017 में देश के अत्यंत सघन वन के क्षेत्रफल में 1.36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जो कि पर्यावरण के लिहाज से अच्छी खबर है.’ उधर सेंटर फॉर साइंस ऐंड एन्वायरमेंट (सीएसआर) के वन विशेषज्ञ अजय सक्सेना का कहना है, ‘सघन वनों में वृद्धि सकारात्मक संकेत है. लेकिन जलवायु में हो रहे बदलाव को नियंत्रित करने के लिए सामान्य वनों पर भी विशेष ध्यान देना होगा. पेड़ों की कटाई रोककर ही जंगलों के घटते क्षेत्रफल को बचाया जा सकता है.’

सीएसई ने यह भी कहा कि है कि साल 2015 की रिपोर्ट में देश के 589 जिलों को शामिल किया गया था जबकि इस बार की रिपोर्ट में 633 जिलों को शामिल किया गया है. उसके मुताबिक इस तथ्य पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं जिलों की संख्या बढ़ाए जाने की वजह से हरित और वन क्षेत्र में वृद्धि की बात न की जा रही हो.