मंगलवार को पोर्ट एलिजाबेथ में हुए पांचवें एक दिवसीय मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 73 रन से हरा दिया. इस जीत के साथ भारत ने सीरीज भी अपने नाम कर ली. साथ ही उसने दो उपलब्धियां अपनी झोली में डाल लीं. पहली, बीते 25 सालों से दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रही भारतीय टीम यहां पहली बार कोई सीरीज अपने नाम करने में सफल रही है. इसके अलावा इस जीत के साथ ही एक दिवसीय मुकाबलों की रैंकिंग में भारत शीर्ष स्थान पर काबिज हो गया है. दिलचस्प यह भी है कि भारत ने नंबर वन का खिताब दक्षिण अफ्रीका की ही टीम से छीना है.

भारत के लिए इस दौरे को यादगार बनाने में कप्तान विराट कोहली की खास भूमिका रही. इस सीरीज में कोहली ने विराट प्रदर्शन दिखाया है. दो शतकों और एक अर्धशतक की बदौलत उन्होंने कुल 429 रन बनाए. इसके साथ ही वे दक्षिण अफ्रीका में किसी एक दिवसीय सीरीज के दौरान 400 रन का आंकड़ा पार करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज भी बन गए. दूसरी तरफ, कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की फिरकी के आगे दक्षिण अफ्रीकी टीम बेबस दिखाई दी. पांच मुकाबलों में कुलदीप ने जहां 16 विकेट चटकाए तो वहीं चहल ने अपनी कलाई घुमाकर 14 विकेट अपने नाम किए. सीरीज का एक मैच अभी खेला जाना बाकी है.

मंगलवार के मुकाबले में टॉस जीतकर दक्षिण अफ्रीका ने भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया था. लय पाने के लिए जूझ रहे रोहित शर्मा ने इस मैच में शानदार वापसी की और शतक जमाया. उनके 115 रन के योगदान से भारत ने विपक्षी टीम को 275 रनों का लक्ष्य दिया. बाद में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही. उसके तीन विकेट धड़ाधड़ गिरे. हाशिम अमला और डेविड मिलर ने मिलकर हालांकि पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी कोई खास कामयाबी नहीं मिल सकी. दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम 43वें ओवर में 201 रन पर सिमट गई. इस तरह भारत ने 73 रन से मुकाबला जीत लिया.

इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका की धरती पर सीरीज जीतने का भारत का सपना पूरा हो चुका है. भारतीय टीम 90 के दशक से दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रही है, लेकिन उसे किसी सीरीज में जीत का स्वाद नहीं मिला. मोहम्म्मद अजहरूद्दीन की कप्तानी में भारत ने यहां 1992 में सात एक दिवसीय मैच खेले थे. दक्षिण अफ्रीका ने उस सीरीज को 5-2 से अपने नाम किया था. 1996-97 में हुई सीरीज के चारों मैच भारत ने गंवाए थे. 2000-01 में एक त्रिकोणीय मुकाबले में हालांकि भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन फाइनल मैच में उसे अफ्रीकी टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. इसी तरह 2006-07, 2010-11 और 2013-14 में दोनों देशों के बीच हुए मुकाबलों में भी भारत को वहां से निराश ही लौटना पड़ा था.