एलिना. एक खूबसूरत, शर्मीली लड़की जिसे सात समंदर दूर रहने वाले लड़के से प्यार हो गया. प्यार ने उससे देस छुड़ाया और उसे परदेस बुला लिया. वो मेरे साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी. उसकी खासियत यह नहीं थी कि वो मास्टर्स की पढ़ाई के लिए रूस के यरोस्लावा से बनारस आई थी. मेरे लिए उसकी खासियत थी उसका रूसी होते हुए भी खालिस हिंदुस्तानी होना. एलिना लगभग सिर झुकाए डिपार्टमेंट आती, खामोशी से सारी क्लासेज करती. किसी से एक ग़ैरज़रूरी बात करना उसकी फितरत से बाहर की चीज़ थी, और फिर किसी लड़के से बात करनी भी पड़ती तो बिना उसकी ओर देखे जल्दी से बात खत्म करती और अपने काम में लग जाती. उसकी नीले रंग की साइकिल, लंबे भूरे बाल, शर्मीली मुस्कान और अपने काम में अच्छा होना, मुझे बहुत अच्छा लगता. उसे देखकर मैं हमेशा सोचती थी कि हमारे भारतीय मानस में ऐसी ही लड़की को तो आदर्श माना गया है. मैं सोचती कि अगर वो मेरे पापा की बेटी होती तो वो उससे कितना खुश रहते.

2014 में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी कर एलिना वापस रूस चली गई. उससे बात होती रहती थी. फिर एक दिन उसने बताया कि वो वापस भारत आ रही है. शादी करने. मुझे ज़रा भी हैरानी नहीं हुई. तब तक उसे इतना तो जान गई थी कि सीधा सोचने और करने वाली लड़की दिल की जितनी साफ है, दिमाग से उतनी ही मजबूत भी है. आज उसकी शादी को कुछ महीने हो चुके हैं. वो मॉस्को की अपनी नौकरी छोड़कर अपने पति के साथ दिल्ली के एक वन बीएचके फ्लैट में रहती है, एक आम भारतीय गृहिणी की तरह अपनी गृहस्थी संभालती है और खुश होती है कि अब उसकी रोटियां फूलने लगी हैं.

इस वैलेंटाइन्स डे को उसकी प्रेमकहानी को 10 साल पूरे हो रहे हैं. 2008 में 13 फरवरी को एलिना ने पहली बार अखिलेश से बात की थी. 20 साल की एलिना उन दिनों ग्रेजुएशन के आखिरी साल में थी, और गाज़ियाबाद में इंजीनयरिंग पढ़ रहे अखिलेश थर्ड इयर में थे. इंटरनेट उन दिनों रूस और भारत के छोटे शहरों में जगह बना चुका था. निमबज़ नाम के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोनों की बातचीत शुरू हुई. अखिलेश विदेशी यूज़र्स से बात करके अपनी अंग्रेज़ी सुधारना चाहते थे. और एलिना बस दूसरी संस्कृतियों के बारे में जानना चाहती थी. एलिना अखिलेश को अंग्रेज़ी लेखकों के कोट्स भेजती और अखिलेश उसे बताते कि उनका दिन कैसा रहा. करीब दो तीन महीने बात करने के बाद अखिलेश ने एक दिन बिना भूमिका के एलिना से पूछा कि क्या वो उससे शादी करेगी. एलिना ने सोच कर जवाब देने के लिए दो दिन मांगे. और दो दिन बाद उसने हां कह दी.

2009 में पहली बार भारत में मिले एलिना और अखिलेश
2009 में पहली बार भारत में मिले एलिना और अखिलेश

इन दो दिनों ने दोनों की ज़िंदगियां बदल दीं. एक दूसरे से हज़ारों मील दूर ये दो लोग अपना हर काम एक दूसरे को ज़ेहन में रख कर करने लगे. एक दूसरे को चिट्ठियां लिखने लगे, तोहफे भेजने लगे. ‘अखिलेश ने पहले तोहफे में मुझे दिल की शेप वाला पेंडेंट दिया था जिसमें हमारी तस्वीरें थीं. फिर उसने गुलाबजल और नेकलेस भी भेजा,’ एलिना शर्माते हुए बताती है.

जून 2008 में एलिना की ग्रेजुएशन पूरी हुई तो उसने ये सोचकर नौकरी कर ली कि वो पैसा इकट्ठा कर अखिलेश से मिलने भारत जाएगी. 20-21 साल की लड़की सात समंदर पार उस शख्स से मिलने आए जिसे उसने बिना देखे, बिना मिले प्यार कर लिया था, ये सब तो फिल्मों में होता है न! पर कहते हैं कि कहानी चाहे फिल्मी हो या किताबी, सारा फिक्शन दुनिया के किसी न किसी कोने में ज़रूर कहीं न कहीं जिया जा रहा होता है. तो अगले एक साल तक काम करने और पैसे जोड़ने के बाद 15 अगस्त 2009 को एलिना भारत आ गई. लेकिन यहां उसका स्वागत सिर्फ अखिलेश ने नहीं किया. पहली बार भारत आने के लिए एलिना ने एक खास दिन चुना था, लेकिन इस खास दिन ने ही उसे मुसीबत में डाल दिया.

हुआ ये कि एलिना जैसे ही अखिलेश के साथ एयरपोर्ट से निकलकर कैब में बैठी, सुरक्षा बलों ने उन दोनों को रोक लिया. उन्हें न सिर्फ थाने ले जाया गया, उनका सारा सामान फिर से खोलकर देखा गया. प्यार के लिए सात समंदर पार आई उस लड़की के लिए इससे बुरा क्या हो सकता था. खैर ये तो सिर्फ शुरूआत थी. अखिलेश ने बनारस में अपने परिवार को फोन पर एलिना के बारे में बता दिया था. और वे डर गए थे कि एक विदेशी लड़की उनके इकलौते बेटे को भारत से रूस ले जाएगी. एलिना के भारत आने के एक सप्ताह बाद अखिलेश के घर वाले उसे देखने ग़ाज़ियाबाद आए.

‘मैं अखिलेश के फ्लैट पर अकेली थी और अखिलेश कॉलेज में था. दरवाज़े पर ज़ोर से खटखटाहट हुई. बाहर कई लोग थे. मैंने दरवाज़ा नहीं खोला. मैं उनमें से किसी को नहीं जानती थी. वे काफी देर तक ज़ोर-ज़ोर से दरवाज़ा खटखटाते रहे. मैं डर गई. लेकिन मैंने दरवाज़ा नहीं खोला और वे वापस लौट गए. अगले दिन वे लोग फिर आए, लेकिन तब अखिलेश घर में था. अखिलेश के पापा थे, उसके जीजाजी, उनके कोई वकील दोस्त और एक और कोई. वो सब बाहर वाले कमरे में बैठे थे, और मैं अंदर. मैं काफी तनाव में थी और खुद को शांत रखने के लिए कोई गाना गा रही थी. मेरी आवाज़ बाहर तक जा रही थी. उन्हें अखिलेश को भेज कर मुझे चुप हो जाने के लिए कहना पड़ा,’ ऐलिना उस दिन को याद करते हुए बताती है.

दिल्ली के अपने घर में खाना खाते एलिना और अखिलेश
दिल्ली के अपने घर में खाना खाते एलिना और अखिलेश

‘फिर उन्होंने मुझे बुलाया, एक क्रिमिनल की तरह सामने बैठाकर सवाल जवाब करने लगे. उन्होंने मेरा ईमेल अड्रेस, मेरा नंबर, मेरी मां का नंबर, सब लिया. हालांकि कभी उनका इस्तेमाल नहीं किया,’ बताते हुए एलिना थोड़ा हंसती है.

उस वक्त एलिना और अखिलेश शादी करना चाहते थे, वे मैरिज रजिस्ट्रार के पास भी गए. लेकिन फिर समझ आया कि अभी उन्हें और पढ़ने की ज़रूरत है. अखिलेश इंजिनियरिंग के चौथे साल में फेल हो गए थे, यानी अभी एक साल और पढ़ाई करनी थी. तो एक हफ्ते बाद एलिना वापस चली गई. उसने फिर से नई नौकरी तलाश की और काम करने लगी. यहां तक कि अखिलेश की एक और अतिरिक्त साल की पढ़ाई का खर्च भी उसने ही दिया.

2011 में एलिना एक बार फिर भारत आई. और जेएनयू में एक और रूसी लड़की से मिली जो इंडियन काउंसिल फ़ॉर कल्चरल रिलेशंस की स्कॉलरशिप पर भारत में पढ़ रही थी. वापस रूस जाकर एलिना ने भी इसके लिए कोशिश की. और काफी मेहनत के बाद उसे ये स्कॉलरशिप मिल गई. 2012 में उसने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ मास कम्युनिकेशन में दाखिला ले लिया. अखिलेश उन दिनों गोरखपुर के एक कॉलेज से एमटेक कर रहे थे. 2014 में पढ़ाई पूरी कर एलिना वापस रूस चली गई. एक बार फिर कुछ पैसे जोड़कर हमेशा के लिए भारत आने के लिए. अभी भारत में रहने के लिए वीज़ा जुगाड़ना इतना आसान नहीं था. पिछले साल यानी मार्च 2017 के आखिर में एलिना अपनी मां के साथ भारत आई. अखिलेश से शादी करने के लिए. शादी को स्पेशल मैरिज एक्ट में रजिस्टर कराने के लिए उसने एक वकील से बात की. उसने कुल 50,000 का खर्च बताया. 20 हज़ार शादी से पहले और बाकी काम होने के बाद. लेकिन उसने कोई मदद नहीं की. वक्त कम था, एलिना की मां को वापस रूस भी जाना था. ऐसे में एलिना ने हिंदू धर्म स्वीकार कर हिंदू मैरिज एक्ट के तहत शादी रजिस्टर करा ली.

लेकिन उनकी मुश्किलें आसान नहीं हुई. 2 अप्रैल 2017 में अखिलेश से शादी करके एलिना वापस रूस चली गई. नौ नवंबर 2017 को वह वापस भारत लौटी . तब से वह स्पाउस वीज़ा पर भारत में रह रही है. लेकिन क्योंकि वह रूसी नागरिक है तो उसे भारत के फॉरन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस जाकर खुद को रजिस्टर कराना था. 16 नवंबर को वो ऑफिस गई लेकिन एफआरआर ने उसे अखिलेश की पत्नी के तौर पर रजिस्टर करने से इनकार कर दिया क्योंकि उनकी शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नहीं हुई थी.

एलिना के फॉर्म पर एफआरआरओ की ओर से लिख दिया गया है कि अखिलेश की पत्नी के रूप में रजिस्टर होने के लिए उसे अपनी शादी को स्पेशल मैरिज एक्ट में रजिस्टर करना होगा
एलिना के फॉर्म पर एफआरआरओ की ओर से लिख दिया गया है कि अखिलेश की पत्नी के रूप में रजिस्टर होने के लिए उसे अपनी शादी को स्पेशल मैरिज एक्ट में रजिस्टर करना होगा

अपनी परेशानी साझा करते हुए अखिलेश बताते हैं, ‘वो चाहते हैं कि हम स्पेशल मैरिज एक्ट में शादी रजिस्टर करें, लेकिन एक शादी दो बार रजिस्टर नहीं हो सकती. दूसरी बार रजिस्टर करने के लिए हमें तलाक लेना होगा. और अगर हम तलाक ले सकते हैं तो इसका मतलब है कि हमारी शादी हो चुकी है. हमारी ब्यूरोक्रेसी ने हमें अजीब हाल में फंसा दिया है. वो खुद के ही कॉन्स्टिट्यूशन को नहीं मानते. जब हम शादीशुदा हैं तो फिर ये मेरी पत्नी को मेरी पत्नी क्यों नहीं मानना चाहते?’

एलिना को इंडियन ओवरसीज़ सिटिज़नशिप चाहिए जो किसी भी भारतीय नागरिक के पति-पत्नी का अधिकार है, लेकिन एफआरआरओ उन्हें पति-पत्नी नहीं मानना चाहता. अखिलेश कहते हैं, ‘उन्होंने यह लिखकर स्टांप लगा दिया कि पहले अपनी शादी को स्पेल मैरिज एक्ट में रजिस्टर कराओ.’ इस बारे में अखिलेश ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी लिखा है, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

एलिना कहती है, ‘मैने धर्म परिवर्तन के बाद शादी की है, लेकिन एफआरआरओ वाले कहते हैं कि भारत में धर्म परिवर्तन कर हिंदू बनने वालों का कोई डेटा नहीं है. अगर यहां ऐसा कोई डेटा नहीं है तो ये सरकार की गलती है मेरी नहीं. इसकी सज़ा मुझे क्यों मिलनी चाहिए?’ आने वाले समय में बच्चों के सवाल पर वो कहती है, ‘हम बच्चे चाहते हैं, लेकिन अभी जब मेरा ही लीगल स्टेटस पता नहीं, तो बच्चों का क्या होगा. मैं उन्हें लेकर रिस्क नहीं लेना चाहती.’ कहते हुए एलिना थोड़ी उदास हो जाती है. देख कर बुरा लगता है कि इस खूबसूरत सी प्रेम कहानी में हमारी ब्यूरोक्रेसी बेकार की विलेन बनी हुई है.