अफगानिस्तान में शांति बहाल करने के लिए तालिबान ने बातचीत का प्रस्ताव रखा है. बुधवार को जारी एक बयान में तालिबान ने कहा, ‘हम शांतिपूर्ण तरीके से अफगान मुद्दे का हल निकालना चाहते हैं.’ हालांकि उसका यह भी कहना है कि शांति प्रस्ताव को उसका घुटने टेकना न समझा जाए.

बीते साल अगस्त से अमेरिका ने अफगान तालिबान के खिलाफ अपना रुख सख्त किया है. इसके बाद अमेरिकी हवाई हमलों में आई तेजी ने कई शहरों से उसके पांव उखाड़ दिए हैं. हालांकि कई ग्रामीण इलाकों में तालिबान का अब भी खासा असर है. मौका मिलने पर वह पलटवार करने से भी नहीं चूकता. हाल ही में राजधानी काबुल में किए गए उसके हमलों में 150 से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

उधर तालिबान की तरफ से बातचीत के प्रस्ताव पर अफगान सरकार के प्रवक्ता ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है. अफगानिस्तान में मौजूद उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की सेना की तरफ से भी फिलहाल कोई बयान नहीं आया है. अफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान के बीच बीते 17 सालों से संघर्ष चल रहा है जिसका कोई नतीजा निकलता नहीं दिखता. ऐसे में तालिबान की तरफ से बातचीत के प्रस्ताव को एक सकारात्मक पहल के रूप में जरूर देखा जा सकता है.