पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में देश के युवाओं से कहते थे कि उन्हें उनकी योग्यता के हिसाब से रोजगार मिलना चाहिए. लेकिन, चार साल बाद आज हकीकत कुछ और दिखती है. सरकार के तमाम दावों के बावजूद युवाओं को उनकी योग्यता के मुताबिक रोजगार नहीं मिल पा रहा. तमिलनाडु में इसकी मिसाल देखने को मिली. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुताबिक राज्य के लोकसेवा आयोग (टीएनपीएससी) ने क्लर्क, टाइपिस्ट और स्टेनोग्राफर के 9500 पदों के लिए 11 फरवरी को परीक्षा का आयोजन किया था. इसके लिए करीब 20 लाख लोगों ने आवेदन दिया. इनमें कई परीक्षार्थी ऐसे हैं जो ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक की डिग्री हासिल कर चुके हैं. खबर के मुताबिक इन आवेदकों में 992 पीएचडी, 23 हजार एमफिल, 2.5 लाख पोस्ट-ग्रेजुएट और आठ लाख ग्रेजुएट हैं.

टीएनपीएससी के तहत 494 वीएओ, 4349 जूनियर सहायक और बिल कलेक्टर, 230 क्षेत्र सर्वेक्षक और ड्राफ्टमैन, 3463 टाइपिस्ट और 815 स्टेनोग्राफर के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी. उसके मुताबिक करीब 19.83 लाख आवेदकों ने परीक्षा दी. दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा के लिए वांछित शैक्षिक योग्यता केवल दसवीं पास थी, लेकिन परीक्षा में ग्रेजुएट छात्रों की संख्या ने बारहवीं और दसवीं पास परीक्षार्थियों को भी पीछे छोड़ दिया.