पंजाब नेशनल बैंक का घोटाला अब मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है. कल तक सरकार के बड़े मंत्री कह रहे थे यह घोटाला भी यूपीए सरकार के वक्त हुआ और मोदी सरकार ने इसे पकड़ा. अब तक केंद्र सरकार के दो मंत्री रविशंकर प्रसाद और प्रकाश जावड़ेकर को सरकार की तरफ से बयान देने के लिए भेजा गया और दोनों ने ही इल्जाम पुरानी सरकार पर लगा दिया. लेकिन अब जो नई जानकारी सामने आई है वह बेहद चौंकाने वाली है.

सीबीआई ने एक नई एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर हीरा व्यापारी नीरव मोदी के मामा मेहुल चोकसी की तीन कंपनियों के बारे में है. नई एफआईआर में साफ-साफ लिखा है कि साल 2017 में भी एक-दो करोड़ नहीं पूरे 4886 करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई. सरकार नई एफआईआर में 17 अभियुक्त हैं. इसमें पहले नंबर पर पंजाब बैंक की मुंबई स्थित ब्रैडी रोड ब्रांच से रिटायर हुए अफसर गोकुलनाथ शेट्टी का नाम है. दूसरे नंबर पर मनोज हेमंत करात का नाम है जो इसी बैंक में सिंगल विंडो ऑपरेटर के तौर पर काम करता था. इसके बाद तीन ज्वेलरी कंपनियों - गीतांजलि जेम्स लिमिटेड, जिल इंडिया लिमिटेड और नक्षत्र ब्रांड लिमिटेड - पर मुकदमा दर्ज हुआ है.

एफआईआर में छठे स्थान पर मेहुल चीनूभाई चोकसी का नाम है. मेहुल तीनों हीरा कंपनियों के मालिक और नीरव मोदी के मामा हैं. वही नीरव को भारत में हीरा कारोबार मे लेकर आये थे. इसके बाद एफआईआर में जो बातें लिखी गई है वे सियासत में अगले कुछ दिनों तक भूचाल ला सकती हैं. सीबीआई के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस शारदा राउत ने लिखा है, ‘बैंक के डिप्टी मैनेजर रहे गोकुलनाथ शेट्टी और सिंगल विंडो ऑपरेटर मनोज करात ने तीन कंपनियों के डायरेक्टर्स के साथ मिलकर साल 2017-2018 में बैंक को 4886 करोड़ रुपए का चूना लगाया. लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिग और फोरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट के जरिए कंपनियों को 4886 करोड़ रुपए दे दिए गए.’

इसे आसान भाषा में कुछ और जानकारी को मिलाकर समझें तो पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई ब्रांच ने मेहुल चोकसी की तीन कंपनियों को दुनिया के अलग-अलग पांच देशों में बैंक गारंटियों के जरिये 4886 करोड़ की रकम इस तरह से दे दी कि किसी को इसका पता तक नहीं चला. एफआईआर के मुताबिक बैंक के अधिकारियों ने इन कंपनियों के नाम लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (दूसरे देश में स्थिति भारतीय बैंकों को लोन देने के लिए दी गई गारंटी) निकालकर पीएनबी बैंक के सिस्टम से इनकी पूरी डीटेल गायब कर दी. इसके अलावा इन कंपनियों के लिए जारी किये गये लेटर ऑफ क्रेडिट्स (विदेशी विक्रेताओं को दी गई बैंक गारंटी) में पहले छोटी रकम डाली गई और फिर बैंक को अंधेरे में रखकर पीछे से रकम बढा दी गई.

अब जो आंकड़े आप पढ़ेंगे उनसे हैरान रह जाएंगे. साल 2017 के सिर्फ तीन महीनों के अंदर ही 4886 करोड़ रुपए का ये घपला हुआ है. मेहुल चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिये 2144 करोड़ रुपए दे दिए गए. दूसरी कंपनी जिल इंडिया लिमिटेड को 566 करोड़ और नक्षत्र ब्रैंड लिमिटेड को 321 करोड़ रुपए इस पीछे के दरवाजे से पहुंचे. इन तीनों को जोड़ें तो साल 2017 के मार्च से लेकर मई महीने के बीच में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिये कुल 3032 करोड़ रुपए दे दिए गए.

अब बात लेटर ऑफ क्रेडिट की. गीतांजलि जेम्स लिमिटेड को लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए 575 करोड़, जिल इंडिया लिमिटेड को 625 करोड़ और नक्षत्र को 598 करोड़ रुपए दिए गए.

इन पैसों को दिये जाने से जुड़ी जानकारियां बेहद दिलचस्प हैं. एक मार्च 2017 से 10 मार्च 2017 तक करीब-करीब हर रोज़ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मॉरीशस ब्रांच से करोड़ों रुपये निकालकर इन तीनों कंपनियों को दिए गए. एक मार्च, तीन मार्च, चार मार्च, छह मार्च, सात मार्च, आठ मार्च, नौ मार्च और 10 मार्च को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी हुआ और उसी दिन या अगले ही दिन इनका इस्तेमाल कर लिया गया.

इसी तरह बेल्जियम के एंटवर्प शहर स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में हुआ. यहां 15 से 22 मार्च तक हर रोज़ करोड़ों रुपए निकाले गए. 22 मार्च 2017 को तो बैंक ऑफ इंडिया की एंटवर्प ब्रांच से एक बार नहीं 12 बार 10 करोड़ से ज्यादा रुपए निकाले गए. इसके बाद बहरीन और जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर की अलग-अलग ब्रांचों से भी तीनों कंपनियों को पैसे मिले हैं. बहरीन में कैनरा बैंक से 30 मार्च को सात बार करोड़ों रुपए निकाले गए. 31 मार्च 2017 को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर की एसबीआई ब्रांच से दस बार करोड़ों रुपए ट्रांसफर कर दिए गए. और यह सिर्फ मार्च महीने की डिटेल है.

अब तक मोदी सरकार दावा करती थी कि उसने घोटाला पकड़ा है, बैंक के सिस्टम मजबूत किए ताकि पैसे बाहर न जा सकें. लेकिन सीबीआई की ही एफआईआर कहती है कि पिछले साल ही 4886 करोड़ रुपए सरकारी बैंकों से निकाल लिए गए. वह भी तब जब मोदी सरकार कह रही थी कि उसने भ्रष्टाचार और कालेधन की समस्या के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है. विपक्ष के हाथ अब सबूत लग चुका है. अब वह प्रधानमंत्री के यह कहने की खिल्ली उड़ाने की कोशिश करेगा कि ‘मैं ना खाऊंगा, और ना खाने दूंगा.’ सीबीआई की एफआईआर कहती है कि तीन महीने में नीरव मोदी के मामा की कंपनियां 4886 करोड़ रुपए खा गईं.