इजरायल में मंगल ग्रह पर इंसान के रहने की संभावनाओं के मद्देनजर किया गया एक महत्वपूर्ण प्रयोग पूरा हो गया है. इजराइल के छह शोधकर्ताओं ने वहां के रेगिस्तान नेज्व में मंगल ग्रह से मिलता-जुलता वातावरण बनाकर यह प्रयोग किया था. यह प्रयोग इजराइल के उपनगर मित्ज्पे रेमान के नजदीक इसलिए किया गया क्योंकि वहां ऐसी कठोर परिस्थितियां मौजूद हैं जिनकी काफी हद तक मंगल ग्रह के वातावरण से तुलना की जा सकती है.

इस दौरान वैज्ञानिकों ने ऐसे क्षेत्रों की जांच की जो मंगल मिशन के लिए बेहद जरूरी हैं. इस दौरान अकेलेपन के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को समझना, सैटेलाइट कम्युनिकेशन स्थापित करना, रेडिएशन मापन और मंगल की मिट्टी में जीवन के संकेत खोजना शामिल था. यह पहली बार है जब इजराइल अपनी स्पेस एजेंसी के सहयोग से डी-मार्स मिशन के तहत इस तरह का प्रयोग कर रहा है. हालांकि दुनियाभर में ऐसी परियोजनाएं चल रही हैं जिनके तहत मंगल जैसा नकली वातावरण बनाकर वहां रहने की संभावनाएं तलाशी जाती हैं. इजरायल का यह मिशन भी ऐसी ही एक परियोजना का हिस्सा है.

ताजा मिशन ऐसे समय में पूरा हुआ है जब मंगल पर जीवन ढूंढने की नासा की कोशिशों को बड़ी कामयाबी मिली है. एक रिपोर्ट के मुताबिक मंगल पर रिसर्च कर रहे नासा के रोबोट रोवर अपॉर्च्यूनिटी को वहां चट्टानों पर धारियां मिली हैं. नासा ने इसी हफ्ते एक बयान जारी करके यह घोषणा की है. वैज्ञानिकों का कहना है कि नम मिट्टी के बार-बार जमने व टूटने का चक्र दोहराए जाने के परिणामस्वरूप जमीन पर ये धारियां बनती हैं. यह इस बात का संकेत भी हो सकता है कि मंगल पर कभी पृथ्वी की तरह ही पानी और हवा की मौजूदगी रही हो. हालांकि नासा ने यह भी कहा है कि ऐसा हवा या ढलान पर किसी चीज के आने-जाने या दूसरी प्रक्रियाओं के चलते भी हो सकता है.