केंद्र सरकार के कामकाज और देश की राजनीति की मौजूदा स्थिति को लेकर देश का मूड का क्या है, इसे लेकर कुछ दिन पहले एक सर्वे आया था. एबीपी न्यूज़ के लिए लोकनीति और सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसायटीज़ (सीएसडीएस) ने देश के 19 राज्यों में यह सर्वे किया था. सर्वे का लुब्ब-ए-लुबाब यह था कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को लेकर लोगों में निराशा है, इसके बावजूद अगले लोकसभा चुनावों में उसके बहुमत के साथ जीतने की संभावना मज़बूत बनी हुई है.

हालांकि सर्वे से निकल कर आई एक बात मोदी सरकार और भाजपा के लिए चिंताजनक है. वह है उसके सबसे बड़े नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कमी आना. सर्वे के मुताबिक़ पिछले आठ महीनों में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कमी आई है. मई 2017 की उनकी लोकप्रियता का प्रतिशत 44 था जो आठ महीने बाद 37 प्रतिशत पर आ गया. हालांकि सर्वे के मुताबिक़ वे अभी भी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं.

वहीं, सर्वे में कांग्रेस के लिए सबसे अच्छी ख़बर उसके सबसे बड़े नेता राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता है. सर्वे के दौरान जब लोगों से पूछा गया कि क्या वे राहुल गांधी को अगले प्रधानमंत्री के के रूप में देखना चाहेंगे तो 20 प्रतिशत लोगों ने हां में जवाब दिया. जबकि इससे पिछले सर्वे में केवल नौ प्रतिशत लोग राहुल गांधी को अगला प्रधानमंत्री देखना चाहते थे. जानकार बताते हैं कि गुजरात चुनाव और कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी को गंभीरता से लिया जाने लगा है. सर्वे में भी कहा गया कि राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में दिखाई देने लगे हैं. इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब लोगों से पूछा गया कि क्या वे अगले चुनाव में राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखना चाहेंगे, तो 48 प्रतिशत लोगों ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी.

ट्विटर फ़ॉलोइंग मोदी से कम, लेकिन नतीजे बेहतर

सर्वे में राहुल गांधी की लोकप्रियता को लेकर सामने आए नतीजों को उनके ट्विटर अकाउंट की बढ़ती लोकप्रियता से भी समझा जा सकता है. हाल के समय में राहुल गांधी की ट्विटर फ़ॉलोइंग में तो इज़ाफ़ा हुआ ही है, उनके हरेक ट्वीट को लोग हाथों हाथ भी ले रहे हैं. रिपोर्ट लिखे जाने तक ट्विटर पर उनके 58 लाख 70 हज़ार से ज़्यादा फ़ॉलोअर थे. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार करोड़ 30 लाख से ज़्यादा ट्विटर फ़ॉलोअर हैं. यानी कांग्रेस अध्यक्ष से सात गुना से भी ज़्यादा. लेकिन इतना बड़ा फ़ासला होने के बावजूद राहुल गांधी को उनकी ट्विटर फ़ॉलोइंग के हिसाब से प्रधानमंत्री की अपेक्षा बेहतर परिणाम मिल रहे हैं. ऐसा तब है जब नरेंद्र मोदी की ट्विटर फ़ॉलोइंग न सिर्फ़ राहुल गांधी से कहीं ज़्यादा है बल्कि वे कांग्रेस अध्यक्ष से कई गुना ज़्यादा ट्वीट कर रहे हैं. संख्या के लिहाज से नरेंद्र मोदी आगे दिखते हैं, लेकिन थोड़ा-सा गणित लगाने पर पता चलता है कि गुणवत्ता के सिद्धांत के लिहाज़ से राहुल गांधी की ट्विटर फ़ॉलोइंग प्रधानमंत्री से बेहतर है.

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यह देखने के लिए हमने एक फ़रवरी से 15 फ़रवरी के बीच दोनों नेताओं द्वारा किए गए ट्वीटों और रीट्वीटों पर ग़ौर किया. इन 15 दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 163 के आसपास ट्वीट और रीट्वीट किए. इनमें 128 ख़ुद के ट्वीट और 35 रीट्वीट शामिल हैं. इन पर पीएम मोदी को 18 लाख 68 हज़ार 600 (के आसपास) लाइक्स और चार लाख 38 हज़ार 660 रीट्वीट मिले. मोदी को अपने ट्वीटों पर कुल 16 लाख 30 हज़ार 540 के आसपास लाइक्स और तीन लाख 88 हज़ार 470 रीट्वीट मिले. वहीं, दूसरों के ट्वीटों को रीट्वीट करने पर उन्हें क़रीब दो लाख 38,060 लाइक्स और 50,190 रीट्वीट मिले.

उधर, राहुल गांधी ने इन 15 दिनों में केवल 20 ट्वीट किए और एक रीट्वीट. इन 20 ट्वीटों पर उनको लगभग चार लाख 47 हज़ार लाइक्स और एक लाख 66 हज़ार 300 रीट्वीट मिले. उनके एकमात्र रीट्वीट पर 8,300 लाइक्स और 3,600 रीट्वीट आए. संख्या यानी क्वॉन्टिटी के हिसाब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राहुल गांधी से बहुत ज़्यादा आगे दिखाई देते हैं. लेकिन ग़ौर करने पर एक दूसरी तस्वीर निकल कर आती है.

जैसा कि जिक्र हुआ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 163 ट्वीट-रीट्वीट किए जो राहुल गांधी के ट्वीटों की संख्या से लगभग आठ गुना ज़्यादा है. इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि राहुल गांधी की अपेक्षा प्रधानमंत्री की ट्विटर सक्रियता आठ गुना ज़्यादा है. अपने ट्वीटों में वे केवल शब्दों का नहीं बल्कि ख़ुद की तस्वीरों, वीडियो आदि का भी भरपूर इस्तेमाल करते हैं. वहीं, राहुल गांधी के ट्वीटों में वे ख़ुद कम दिखाई देते हैं. वीडियो-ग्राफ़िक्स वग़ैरा का इस्तेमाल भी कम है.

फिर भी, औसत के लिहाज़ से राहुल गांधी को अपने हरेक ट्वीट पर पीएम मोदी से ज़्यादा लाइक्स और रीट्वीट मिले. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने हर ट्वीट पर औसतन 12,740 लाइक्स और 3,035 रीट्वीट मिले, जबकि राहुल गांधी को अपने हर ट्वीट पर औसतन 22,350 लाइक्स और 8,315 रीट्वीट मिले. वहीं, किसी दूसरे के ट्वीट को रीट्वीट करने पर नरेंद्र मोदी को औसतन 6,800 लाइक्स और 1,433 रीट्वीट मिले, जबकि राहुल गांधी ने केवल एक रीट्वीट किया और उन्हें उस पर 8,300 लाइक्स और 3,600 रीट्वीट मिले. इस तरह राहुल गांधी को इन 15 दिनों के दौरान अपनी कुल ट्विटर फ़ॉलोइंग के हिसाब से 7.77 प्रतिशत (लाइक्स) परिणाम मिला. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह आंकड़ा 4.35 फीसदी रहा.

वापस संख्या की बात करें तो ऐसा कई बार हुआ जब एक दिन में नरेंद्र मोदी को एक लाख से लेकर दो लाख से भी ज़्यादा लाइक्स मिले. लेकिन ऐसा किसी विशेष घटना या दिन होने या काफ़ी ज़्यादा ट्वीट करने की वजह से हुआ. मिसाल के लिए तीन जनवरी को भारत ने अंडर-19 विश्व कप जीता था. देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने टीम को ट्वीट के ज़रिए बधाई दी. सबसे ज़्यादा लाइक्स (61,000) इसी ट्वीट को मिले. इसी तरह 14 फ़रवरी को उन्होंने विदेश मंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए ट्वीट किया. उस ट्वीट को 42,000 लाइक्स मिले. इन दोनों ही ट्वीटों का सरकार के कामकाज से कोई लेना-देना नहीं था. सात फ़रवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट भाषण दिया था. उस दिन उन्हें ट्विटर पर एक लाख 55 हज़ार 200 लाइक्स मिले. लेकिन ऐसा 16 ट्वीट करने के बाद हुआ. इस तरह हरेक ट्वीट पर उन्हें औसतन 9700 लाइक्स मिले. वहीं, सरकार के बजट पर राहुल गांधी के तंज़ भरे ट्वीट को 35,000 से ज़्यादा लाइक्स मिले.

राहुल-मोदी और फ़र्ज़ी फ़ॉलोअर

हालांकि, बतौर लोकप्रिय नेता नरेंद्र मोदी के बाद अब राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल को भी फ़र्ज़ी ट्विटर अकाउंटों के ज़रिए प्रचारित किए जाने का आरोप लग चुका है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई की अक्टूबर 2017 की एक रिपोर्ट में राहुल के ट्विटर हैंडल पर सवाल उठाए गए थे. रिपोर्ट में राहुल गांधी के एक रीट्वीट के हवाले से पूछा गया था कि क्या उन्हें ट्विटर पर लोकप्रिय बनाने के लिए ‘बोट्स’ (यानी फ़र्ज़ी अकाउंटों) का इस्तेमाल किया जा रहा है. रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा नेता और मंत्री कांग्रेस अध्यक्ष पर तंज़ करने लगे. कांग्रेस नेताओं ने भी उनका जवाब दिया.

राहुल गांधी से पहले नरेंद्र मोदी की ट्विटर फ़ॉलोइंग भी सवालों के घेरे में रही है. अक्टूबर 2012 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि नरेंद्र मोदी के आधे ट्विटर फ़ॉलोअर फ़र्ज़ी हैं. उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. नवंबर 2011 के कुछ महीनों बाद उनकी ट्विटर फ़ॉलोइंग में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ था. तब कांग्रेस ने उनकी फ़ॉलोइंग को फ़ेक बताया था और भाजपा नेताओं ने बचाव किया था. दुनिया भर के बड़े नेताओं पर यह आरोप लगता रहा है कि वे अपनी लोकप्रियता दिखाने के लिए फ़ेक या बोट अकाउंटों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अभी बात केवल परिणाम तक सीमित रखते हैं.

नतीजे ज़्यादा महत्वपूर्ण

आम तौर पर माना जाता है कि ट्विटर (या किसी और प्लेटफ़ॉर्म) पर जितना ज़्यादा लोग आपको फ़ॉलो करें उतना अच्छा है. किसी व्यक्ति के लिए यह व्यक्तिगत संतुष्टि की वजह भी हो सकती है कि उसे लाखों-करोड़ों लोग फ़ॉलो करते हैं. लेकिन ट्विटर व इंटरनेट विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना कारण ही बढ़ती फ़ॉलोइंग अंत में नुक़सान ही पहुंचाती है. उनके मुताबिक़ लाखों की फ़ॉलोइंग के बावजूद किसी को गिनती के रीट्वीट मिल रहे हैं तो इसका मतलब है कि आपके ज़्यादातर सोशल मीडिया मित्र फ़र्ज़ी हैं. तीस लाख की फ़ॉलोइंग वाले व्यक्ति को अगर केवल 300 रीट्वीट मिलते हैं तो यह काफ़ी ख़राब परिणाम माना जाता है और सोशल मीडिया को लेकर संबंधित व्यक्ति या कंपनी की रणनीति पर सवाल उठाता है.

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर मशहूर हस्तियों को अपने पोस्टों पर ज़्यादातर परिणाम उनके 20 प्रतिशत वास्तविक फ़ॉलोअरों से ही मिलते हैं. यानी फ़र्ज़ी ट्विटर अकाउंट (जिन्हें बोट भी कहा जाता है) ख़रीदे या बनाए जा सकते हैं, लेकिन उनसे ज़्यादा परिणाम नहीं निकलवाया जा सकता. अगर किसी को अपने पोस्ट को आगे बढ़ाना है तो ऐसा केवल वास्तविक फ़ॉलोअरों के ज़रिए ही संभव है. फ़र्ज़ी फ़ॉलोअर केवल संख्या दिखाने के लिए होते हैं.

इसलिए अधिकता से बेहतर है गुणवत्ता

सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या संस्थान को फ़ॉलो करने वालों की संख्या उसके लोकप्रिय होने का पैमाना बन गई है. जानकारों के मुताबिक यह बिलकुल ऐसे ही है जैसे बॉलीवुड में 100-200 करोड़ रुपये कमाने वाली फ़िल्मों और उनमें काम करने वाले अभिनेताओं को सामान्यतः अच्छा और लोकप्रिय मान लिया जाता है. ‘जो हिट है वही फ़िट है’ वाला यह फ़ॉर्मूला ट्विटर-फ़ेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों के लिए भी सही मान लिया गया है. लेकिन जानकारों की मानें तो गुणवत्ता के सिद्धांत की अनदेखी करना संभव नहीं है.

ट्विटर विशेषज्ञों के मुताबिक अहम मुद्दों पर प्रासंगिक और अपेक्षित बात करके कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति (या नेता) लोगों को अपने अकाउंट से जोड़ सकता है. आप अपनी बात दिलचस्प और रचनात्मक रूप से रख कर ऐसा कर सकते हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने पर आपको ज़्यादा परिणाम मिलते हैं. इन दिनों राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट पर ये बातें लागू होती हैं. वे चर्चित विवादों और मुद्दों पर अपनी बात अलग तरह से रख रहे हैं. मिसाल के लिए पीएनबी घोटाले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बजट भाषण को लेकर उनके ट्वीट काफ़ी दिलचस्प हैं. नीरव मोदी मामले पर उन्होंने अपनी बात रसायन विज्ञान के किसी फ़ॉर्मूले की तर्ज़ पर रखी तो पीएम के बजट भाषण पर उन्होंने कविता के अंदाज़ में तंज़ किया. इन दोनों ही ट्वीटों को काफ़ी लाइक्स और रीट्वीट मिले.