नेताओं के लिए यह कहा जाना आम है कि वे पांच साल में केवल एक बार यानी चुनाव के समय ही जनता के पैरों में दिखाई देते हैं, और चुनाव जीतने के बाद अगले चुनाव तक जनता को अपने पैरों पर रखते हैं. इसी धारणा को आधार बनाकर राजस्थान से भाजपा विधायक ओमप्रकाश हुडला की एक तस्वीर वाट्सएप पर कई महीनों से वायरल है.

इस तस्वीर में महुआ विधानसभा सीट से विधायक ओमप्रकाश हुडला बिस्तर पर लेटे-लेटे किसी से फ़ोन पर बात कर रहे हैं. उनके पलंग की बगल में कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं. देखकर लगता है कि ये लोग भाजपा विधायक के पास कोई फ़रियाद लेकर आए थे. दावा किया जा रहा है कि भाजपा विधायक ओमप्रकाश हुडला इसी अंदाज़ में फरियादियों से मिलते हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा है?

ऐसा नहीं है. यह दावा इस तस्वीर की असल कहानी को पेश नहीं करता. यह सही है कि तस्वीर में बिस्तर पर लेटा व्यक्ति भाजपा विधायक ओमप्रकाश हुडला हैं. लेकिन यह बात सही नहीं है कि वे अपने यहां आए लोगों से इसी अंदाज़ में मिलते हैं. तस्वीर का सच जानने की कोशिश के दौरान हमें ओमप्रकाश हुडला की एक दूसरी तस्वीर मिली जो सोशल मीडिया के दावे को ग़लत साबित नहीं करती, लेकिन उसे सच मानने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर ज़रूर करती है.

नवंबर 2017 में विधायक ओमप्रकाश हुडला ने एक सरकारी अस्पताल का दौरा किया था. हुडला ने अपने फ़ेसबुक अकाउंट से बताया कि अस्पताल के डॉक्टर उस समय पर हड़ताल पर थे जिससे मरीज़ों को काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा था. निरीक्षण के दौरान विधायक ने वहां की गंदगी देखकर सवाल किया तो कर्मचारी बगलें झांकने लगे. इसके बाद विधायक ओमप्रकाश ने वह काम किया जो ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के नाम पर संभवतः किसी ने नहीं किया. हुडला ख़ुद शौचालय में घुसे और अपने हाथों से उसकी सफ़ाई की. नीचे तस्वीरें देखी जा सकती हैं.

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आलोचक और राजनीतिक विरोधी कह सकते हैं कि ओमप्रकाश हुडला ने अपनी पार्टी और सरकार के एजेंडे के लिए ऐसा किया होगा, लेकिन जो भी उन्होंने किया वह अपने आप में एक अपवाद है और सोशल मीडिया के इस दावे पर तो निश्चित ही सवाल उठाता है कि वे आम लोगों से ‘राजा साहब’ की तरह मिलते हैं.

दरअसल, ओमप्रकाश हुडला को दमे की दिक़्क़त है. उनकी तबीयत ज़्यादा ख़राब होती है तो वे अपने कमरे में ही रहकर लोगों से मिलते हैं. जिस समय उनके बिस्तर पर लेटे रहने वाली तस्वीर वायरल हुई तब वे काफ़ी बीमार थे. उसी दौरान कुछ लोग उनसे मिलने आए थे. हुडला ख़ुद बता चुके हैं कि उन लोगों की समस्या आपातकालीन थी इसलिए उन्होंने उनकी बात उसी समय सुनी. तस्वीर को लेकर उन्होंने कहा कि विरोधियों ने ग़लत अफ़वाह फैलाई थी.

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